सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कुत्तों के चलते लोग कब तक परेशानी झेलेंगे?

How long will people suffer because of dogs?
How long will people suffer because of dogs?

How long will people suffer because of dogs?, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर आम लोग कब तक आवारा कुत्तों की वजह से परेशानी झेलते रहेंगे। कोर्ट ने साफ किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत परिसरों (Institutional Areas) तक सीमित है।

स्कूल, अस्पताल और कोर्ट कैंपस में कुत्तों की जरूरत क्या?

पीठ ने सवाल किया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालत परिसरों के भीतर आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि इन जगहों पर बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे अहम है और वहां से कुत्तों को हटाने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

सिर्फ काटना नहीं, हादसों का भी खतरा

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला केवल कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं है। आवारा कुत्तों से सड़क दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि कोई यह तय नहीं कर सकता कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा और किससे खतरा पैदा हो सकता है।

कपिल सिब्बल की दलील पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आवारा कुत्तों के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि जब भी वे मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर गए हैं, उन्हें कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब देते हुए कहा—

“आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है और लोग मर रहे हैं।”

नसबंदी के बाद छोड़ने पर कोर्ट का तंज

कपिल सिब्बल ने सुझाव दिया कि जो कुत्ता किसी को काटे, उसे पकड़कर सेंटर ले जाया जाए, उसकी नसबंदी की जाए और फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाए। इस पर कोर्ट ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा— “अब तो बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों की भी काउंसलिंग कर दी जाए, ताकि वापस छोड़े जाने पर वे काटें नहीं।”

ABC नियमों पर सरकार से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित सरकारों से सवाल किया कि वर्ष 2018 में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे, फिर भी उनका सही तरीके से पालन क्यों नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि नियमों के पालन में देरी का खामियाजा आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए।

अगली तारीख 8 जनवरी

बुधवार को इस मामले की सुनवाई करीब ढाई घंटे तक चली। इसके बाद कोर्ट ने कार्यवाही स्थगित कर दी। अब इस केस की अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे से होगी।

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