
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीर पंजाल क्षेत्र के अस्तित्व को लेकर की गई एक टिप्पणी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह टिप्पणी भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा की ओर से की गई, जिसके बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन और विपक्षी भाजपा के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
यह विवाद राजौरी-पुंछ को पीर पंजाल क्षेत्र और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ को चेनाब क्षेत्र कहे जाने को लेकर केंद्रित है।
अस्तित्व पर टिप्पणी से हंगामा
विधानसभा में पीर पंजाल के अस्तित्व पर टिप्पणी से हंगामा
BJP नेता सुनील शर्मा के बयान पर सत्तारूढ़ विधायकों का विरोध
राजौरी-पुंछ बनाम चेनाब घाटी को लेकर पुराना क्षेत्रीय विवाद
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापना की मांग से भड़का मामला
सुनील शर्मा ने माफी मांगने से किया इनकार
क्या है पीर पंजाल क्षेत्र, कहां स्थित है?
पीर पंजाल क्षेत्र पीर पंजाल पर्वतमाला से जुड़ा हुआ है, जो पश्चिमी हिमालय के निचले हिस्से में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है।
यह पर्वतमाला ब्यास नदी से लेकर नीलम-किशनगंगा नदी तक दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम दिशा में फैली हुई है।
यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फैला है
इसका उत्तर-पश्चिमी हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी जाता है
ब्यास, रावी, झेलम और चेनाब जैसी प्रमुख नदियां यहीं से निकलती हैं
राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से
राजौरी-पुंछ → पीर पंजाल क्षेत्र
रामबन-डोडा-किश्तवाड़ – चेनाब घाटी
पीर पंजाल नाम की उत्पत्ति कैसे हुई?
पीर पंजाल पर्वतमाला का नाम पीर पंजाल दर्रे से जुड़ा है। इसका उल्लेख 12वीं सदी के कवि कल्हण की ऐतिहासिक रचना राजतरंगिणी में मिलता है, जिसे कश्मीर के राजा श्रीवर ने लिखवाया था।
प्रसिद्ध इतिहासकार एम.ए. स्टाइन के अनुसार,
इस क्षेत्र के इस्लामीकरण के बाद संभवतः देवता की अवधारणा को ‘पीर’ की अवधारणा में बदला गया, और धीरे-धीरे यह नाम प्रचलन में आ गया।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) को पीर पंजाल क्षेत्र में स्थापित करने की मांग उठी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने विधानसभा में कहा—
“मुझे नहीं पता कि यह पीर पंजाल खित्ता कौन सा है।”
बस इसी बयान के बाद सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया।
भाजपा बनाम कांग्रेस-NC
भाजपा विधायकों का कहना था कि “पूरा जम्मू-कश्मीर एक है, क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को बांटने की साजिश हो रही है।”
वहीं कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस बयान को अपमानजनक बताते हुए
सुनील शर्मा से माफी की मांग की।
कैसे फैला पूरा ‘रायता’?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद तब और गहराया जब
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने—
राजौरी-पुंछ
पीर पंजाल
और चेनाब घाटी के जिलों
को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक डिवीजन बनाने की मांग रखी।
महबूबा मुफ्ती ने दूरस्थ इलाकों, पहाड़ी भूगोल और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला दिया, लेकिन भाजपा ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।
पीर पंजाल और चेनाब घाटी के लोगों की शिकायत क्या है?
राजौरी और पुंछ जिले LOC के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्र हैं। यहां के लोगों का आरोप है कि—
विकास योजनाओं में उपेक्षा
प्रशासनिक अनदेखी
राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी
के चलते वे जम्मू डिवीजन और कश्मीर घाटी दोनों से कटे हुए महसूस करते हैं।
चेनाब घाटी के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन भी दुर्गम पहाड़ी जिले हैं, जो चेनाब नदी द्वारा निर्मित हैं।
भाजपा का आधिकारिक रुख
सुनील शर्मा ने बाद में स्पष्ट किया कि—
- “पीर पंजाल” शब्द किसी क्षेत्रीय राजनीतिक साजिश का हिस्सा है
- यह ‘ग्रेटर कश्मीर’ जैसी अवधारणा को बढ़ावा देता है
- भाजपा इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी
उन्होंने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।
क्यों भड़के सत्तारूढ़ विधायक?
राजौरी-पुंछ से आने वाले कई विधायकों ने कड़ा विरोध किया, जिनमें—
- उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी
- वन मंत्री जावेद राणा
शामिल थे।
थानामंडी से निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा—“यह बयान केवल पीर पंजाल ही नहीं, बल्कि चेनाब घाटी का भी अपमान है। हम सीमावर्ती लोग हैं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने बलिदान दिए हैं। पुंछ में ही 16 लोग शहीद हुए थे—उन बलिदानों का अपमान किया गया है।”
निष्कर्ष
पीर पंजाल को लेकर उठा यह विवाद केवल एक शब्द या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह
जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी क्षेत्रीय संतुलन, पहचान और राजनीतिक संवेदनशीलता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद प्रशासनिक ढांचे और क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।










