ईरान में सत्ता परिवर्तन: Mojtaba Khamenei बने नए सुप्रीम लीडर? IRGC के दबाव और युद्ध के बीच बड़ा फैसला

Iran’s regime change: Mojtaba Khamenei becomes the new Supreme Leader? Amid pressure from the IRGC and war, a major decision is underway.

Iran’s regime change: Mojtaba Khamenei becomes the new Supreme Leader? Amid pressure from the IRGC and war, a major decision is underway, अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों और Ali Khamenei की मौत के बीच ईरान में सत्ता परिवर्तन की बड़ी खबर सामने आई है। UK आधारित Iran International ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि देश की सबसे शक्तिशाली धार्मिक संस्था Assembly of Experts ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

47 साल बाद फिर चुना गया सुप्रीम लीडर

रिपोर्ट के मुताबिक, यह चुनाव 3 मार्च 2026 को उस समय हुआ जब देश युद्ध की स्थिति में था और अली खामेनेई का निधन हो चुका था। ईरान की 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह दूसरी बार है जब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम लीडर चुना है। इससे पहले 1989 में अली खामेनेई को इस पद पर नियुक्त किया गया था।

क्या है असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स?

Assembly of Experts 88 मौलवियों की संवैधानिक संस्था है, जिसे सुप्रीम लीडर की नियुक्ति, निगरानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने का अधिकार प्राप्त है। बताया गया है कि युद्ध की स्थिति और सुरक्षा कारणों से इसकी दो वर्चुअल बैठकें आयोजित की गईं—एक सुबह और एक शाम—जिनमें यह फैसला लिया गया।

IRGC का दबाव और सत्ता संतुलन

सूत्रों के अनुसार, ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC ने धार्मिक नेताओं पर दबाव बनाया कि मोजतबा को ही चुना जाए, ताकि युद्ध के माहौल में कठोर नीतियों और सत्ता की निरंतरता बनी रहे।

ईरान में IRGC का सेना, अर्थव्यवस्था और राजनीति पर गहरा प्रभाव माना जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह चयन हार्डलाइनर गुट की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे बड़े बेटे हैं। वे एक मिड-रैंक शिया धर्मगुरु हैं और लंबे समय से अपने पिता के इनर सर्कल का हिस्सा रहे हैं।
उन्हें पहले से ही संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था, खासकर IRGC और बसिज फोर्स से उनके मजबूत संबंधों के कारण।

हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी धार्मिक और राजनीतिक वैधता साबित करने की होगी, क्योंकि उनके पास अपने पिता जैसा उच्च धार्मिक दर्जा (आयतुल्लाह) नहीं है।

विवाद क्यों?

ईरान की 1979 की इस्लामिक क्रांति का मूल उद्देश्य राजशाही और वंशानुगत सत्ता को खत्म करना था। ऐसे में पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च नेता बनना कई लोगों के लिए क्रांति की भावना के खिलाफ माना जा रहा है।
ईरान लंबे समय से वंशवादी उत्तराधिकार की आलोचना करता रहा है, इसलिए इस कदम को लेकर देश के भीतर असंतोष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

आगे की चुनौती

नए नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है—

  1. अंतरराष्ट्रीय दबाव और युद्ध की स्थिति
  2. देश के भीतर वैधता और स्वीकार्यता

यदि यह नियुक्ति औपचारिक रूप से पुष्टि होती है, तो मोजतबा खामेनेई को सत्ता बनाए रखने के लिए काफी हद तक IRGC पर निर्भर रहना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले को आलोचना का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इसे एक तरह के वंशवादी कदम के रूप में देखा जा रहा है। ईरान इस समय युद्ध और नेतृत्व परिवर्तन—दोनों के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

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