
खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगर हालात कूटनीति से नहीं संभले तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। आइए इसे क्रमवार समझते हैं:
UAE की सख्त चेतावनी
United Arab Emirates ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अब सिर्फ बचाव की मुद्रा में नहीं रहेगा।
- राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार Anwar Gargash ने कहा कि ईरान को समझना चाहिए कि वह अपने पड़ोसियों से जंग नहीं लड़ रहा है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री Reem Al Hashimy ने CNN से कहा कि अगर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे तो UAE “ज्यादा लड़ाकू भूमिका” अपना सकता है।
- UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने 137 बैलिस्टिक मिसाइलें और 209 ड्रोन दागे। अधिकांश को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन कुछ ड्रोन ने असर डाला।
- राजधानी Abu Dhabi और टूरिस्ट हब Dubai को निशाना बनाए जाने की खबर है।
यहां तक कि Burj Khalifa के आसपास के इलाकों में भी हमलों की सूचना है।
UAE ने दावा किया है कि उसके पास दुनिया के सबसे उन्नत एयर-डिफेंस सिस्टम में से एक है और वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
सऊदी अरब पहले दे चुका है चेतावनी
Saudi Arabia ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि रियाद या पूर्वी हिस्सों पर हमला हुआ तो जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
- राजधानी Riyadh में धमाकों की खबरें सामने आई हैं।
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्वी रियाद में जोरदार विस्फोट और धुएं के गुबार देखे गए।
यदि सऊदी सीधे युद्ध में सक्रिय भूमिका लेता है तो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देश भी दबाव में आ सकते हैं।
ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि अगला हमला पहले से ज्यादा ताकतवर होगा।
अमेरिका की चेतावनी
अमेरिका की ओर से पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान बड़ा हमला करता है तो अमेरिका “ऐसी ताकत से जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।”
🇮🇱 इजरायल पहले से मोर्चे पर
Israel और Iran के बीच सीधा टकराव पहले ही चल रहा है।
अगर UAE और सऊदी जैसे देश खुलकर शामिल होते हैं, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
क्या ईरान अलग-थलग पड़ रहा है?
- खाड़ी के पारंपरिक रूप से “तटस्थ” माने जाने वाले देश अब खुलकर चेतावनी दे रहे हैं।
- अमेरिका और इजरायल पहले से सक्रिय हैं।
- तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और समुद्री मार्ग (खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य) पर खतरा बढ़ सकता है।
संभावित असर
मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य गठबंधन बनाम ईरान
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
शेयर बाजारों में अस्थिरता
वैश्विक शिपिंग रूट्स पर खतरा









