
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा political twist देखने को मिला है। कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी । कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि की है। गुलाम अहमद मीर ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी ने बंगाल में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।
ममता बनर्जी पहले ही कर चुकी थीं साफ
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी यह स्पष्ट कर चुकी थीं कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी। ममता बनर्जी ने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा बंगाल में अकेले चुनाव लड़ती है और बाकी सभी पार्टियां उसके खिलाफ मैदान में उतरती हैं। उन्होंने कहा, “उन्हें लड़ने दीजिए, हर पार्टी की अपनी सोच होती है।”
लेफ्ट से भी नहीं बनी बात
गौरतलब है कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट के साथ seat-sharing agreement किया था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने वाम दलों के साथ किसी भी गठबंधन को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसी वजह से यह अटकलें तेज थीं कि क्या कांग्रेस 2011 की तरह तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएगी, लेकिन अब इन कयासों पर विराम लग गया है।
अधीर रंजन चौधरी का बयान
कांग्रेस के इस फैसले पर वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी आलाकमान ने जो भी निर्णय लिया है, वह उसके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का फैसला सभी को स्वीकार है।
बंगाल में कांग्रेस का चुनावी रिकॉर्ड
अगर पिछले चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो 2016 में कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने पहली बार मिलकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं, जबकि CPI(M) ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में हालात पूरी तरह बदल गए। कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट दोनों ही एक भी सीट जीतने में नाकाम रहे। 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को राज्य में सिर्फ एक सीट मिली, जबकि लेफ्ट का खाता भी नहीं खुल सका।
2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और लेफ्ट अलग-अलग मैदान में थे। उस चुनाव में कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं, जबकि वाम दलों को कोई सफलता नहीं मिली थी।
लेफ्ट का स्टैंड क्या है?
CPI(M) ने कांग्रेस का नाम लिए बिना बयान जारी करते हुए कहा कि पार्टी बंगाल में TMC और BJP दोनों को हराने के लिए काम करती रहेगी। पार्टी का कहना है कि समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ सभी लोकतांत्रिक दलों को एकजुट होना चाहिए। वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, BJP और TMC विरोधी वोटों को एक साथ लाने की रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कांग्रेस नेताओं की अंदरूनी राय
बंगाल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ लड़ाई की बात जरूर करती हैं, लेकिन राज्य में कांग्रेस और माकपा को सबसे ज्यादा नुकसान भी उन्हीं की पार्टी पहुंचाती है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कांग्रेस — तीनों का बड़ा वोट बैंक अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ा है। ऐसे में ममता बनर्जी नहीं चाहतीं कि यह वोट बैंक किसी भी तरह से बंटे, और इसी वजह से वह हर हाल में चुनाव अकेले लड़ने की रणनीति अपनाती हैं










