
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक में शामिल न्यायपालिका से संबंधित एक अध्याय को लेकर उठे विवाद पर सुनवाई की। कोर्ट ने संबंधित अध्याय की सामग्री पर अस्थायी रोक लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही पुस्तक की प्रिंट और डिजिटल कॉपियों को फिलहाल वितरण और उपलब्धता से हटाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मामले की विस्तृत जांच की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) और अन्य न्यायाधीश शामिल थे, ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पाठ्यपुस्तक की तैयारी से संबंधित बैठकों का रिकॉर्ड, लेखकों और संपादकों के नाम तथा स्वीकृति की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर्ट ने विस्तृत जांच की आवश्यकता पर जोर दिया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सामग्री किस प्रक्रिया के तहत तैयार और स्वीकृत की गई। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी भी शैक्षणिक सामग्री को तैयार करते समय संतुलन, सटीकता और संस्थागत गरिमा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि शैक्षणिक सामग्री छात्रों को संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करे।
शिक्षा मंत्रालय ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को बताया कि संबंधित पुस्तक की सीमित संख्या बाजार में पहुंची थी और उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पुस्तक की समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाएंगे।
सरकार ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।
डिजिटल सामग्री को भी हटाने के निर्देश
सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में यह बात भी लाई गई कि पुस्तक की कुछ सामग्री डिजिटल रूप में भी उपलब्ध है। इस पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि विवादित सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी हटाया जाए, ताकि जांच पूरी होने तक वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न रहे।
मामला कैसे सामने आया
यह मामला तब सामने आया जब 23 फरवरी 2026 को NCERT ने कक्षा 8 के लिए ‘Exploring Society: India and Beyond Part 2’ नामक नई सोशल साइंस पुस्तक जारी की। इस पुस्तक के एक अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका के साथ-साथ न्याय प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे लंबित मामलों और न्याय तक पहुंच से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था। इस सामग्री पर कुछ आपत्तियां सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।
सरकार ने संतुलित प्रस्तुति की आवश्यकता पर जोर दिया
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि किसी विषय में संस्थागत चुनौतियों का उल्लेख किया जाता है, तो उसे व्यापक संदर्भ में और संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसमें शासन के सभी अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की भूमिका और जिम्मेदारियों का समुचित उल्लेख होना चाहिए। सरकार ने यह भी कहा कि पाठ्यपुस्तकों में शामिल आंकड़ों और तथ्यों का संबंधित प्राधिकरणों के साथ उचित सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
NCERT ने वेबसाइट से पुस्तक हटाई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद NCERT ने संबंधित पुस्तक को अपनी आधिकारिक वेबसाइट से अस्थायी रूप से हटा दिया है। NCERT के अधिकारियों ने कहा है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और वे न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करेंगे।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई में संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा है कि जांच के आधार पर यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली में छात्रों को सटीक, संतुलित और जिम्मेदार सामग्री उपलब्ध कराना सभी संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।










