
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई 21 अप्रैल 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। यह मामला मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर दिए गए कथित बयानों से जुड़ा हुआ है।
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और एन. के. सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला विस्तृत सुनवाई की मांग करता है, इसलिए इसे नियमित सुनवाई वाले दिन (मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार) में सुना जाएगा।
AAP की ओर से क्या दलील दी गई?
आम आदमी पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पीठ ने पहले ही संकेत दिया था कि इस मामले को नियमित मामलों के दिन ही सुना जाना चाहिए। इसी आधार पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने दलील दी कि यह मानहानि का मामला एक राजनीतिक दल से जुड़ा है और शिकायतकर्ता को पार्टी की ओर से याचिका दायर करने का अधिकार प्राप्त है।
निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 30 सितंबर 2024 को शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने उस समय यह अहम सवाल उठाया था कि
क्या कोई राजनीतिक दल या उसका प्रतिनिधि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 199 के तहत “असंतुष्ट व्यक्ति” की श्रेणी में आता है या नहीं?
दिल्ली हाई कोर्ट का रुख
दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि AAP नेताओं के बयान प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं और उनका उद्देश्य भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचाकर अनुचित राजनीतिक लाभ हासिल करना था।
हाई कोर्ट ने
- अरविंद केजरीवाल
- आतिशी
- पूर्व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार गुप्ता
- AAP नेता मनोज कुमार
द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि IPC की धारा 499 और 500 के तहत जारी समन आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
मानहानि मामला कैसे शुरू हुआ?
दिल्ली बीजेपी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में राजीव बब्बर ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2018 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP नेताओं ने दावा किया था कि भाजपा के इशारे पर निर्वाचन आयोग ने
बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदायों के करीब 30 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए।
बब्बर का कहना है कि इस बयान से भाजपा की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
AAP नेताओं की सफाई
केजरीवाल और अन्य आरोपियों का कहना है कि
- उनके बयान मानहानि की श्रेणी में नहीं आते,
- निचली अदालत यह समझने में विफल रही कि उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता।










