
बजट सत्र में राहुल गांधी के भाषण से शुरू हुआ विवाद
लोकसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण ने संसद में जबरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में एपस्टीन फाइल्स, उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े अमेरिका में चल रहे केस, भारत-अमेरिका संबंधों, डेटा सुरक्षा और केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयानों पर केंद्रीय मंत्रियों किरेन रिजिजू और प्रल्हाद जोशी ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।
अडाणी केस पर बयान और सदन में तीखी नोकझोंक
राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका में अडाणी के खिलाफ चल रहा केस दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने की रणनीति है, जिससे भाजपा का वित्तीय ढांचा प्रभावित होगा। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपने आरोपों को साबित करें, अन्यथा ऐसी बातें सदन के रिकॉर्ड में नहीं जानी चाहिए। इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया कि वे तुरंत सबूत देने को तैयार हैं, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि अभी सबूत देने की आवश्यकता नहीं है और वे अपनी बात जारी रखें।
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की तैयारी
सत्र के बाद किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार राहुल गांधी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिना किसी प्रमाण के प्रधानमंत्री और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सदन को गुमराह किया है।
केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
अपने भाषण में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर देश के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारत के रणनीतिक फैसलों पर बाहरी दबाव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के कारण देश की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और अब यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा।
वैश्विक टकराव और जियोपॉलिटिक्स पर राहुल का बयान
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया जियोपॉलिटिकल टकराव के दौर से गुजर रही है। उन्होंने गाजा और रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ऊर्जा और वित्त अब वैश्विक राजनीति के हथियार बन चुके हैं। उनके अनुसार सरकार के बजट में इन चुनौतियों से निपटने की स्पष्ट रणनीति नहीं दिखाई देती।
डेटा सुरक्षा और AI को लेकर सरकार पर सवाल
डेटा सुरक्षा के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में डेटा पेट्रोल की तरह महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी कंपनियों को डेटा से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कर छूट देने की नीति अपनाई है, जिससे भारत के लोगों के डेटा पर अमेरिका और चीन की नजर है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार होती तो किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारतीय डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती।
एपस्टीन फाइल्स और अनिल अंबानी का मुद्दा
राहुल गांधी ने उद्योगपति अनिल अंबानी का भी जिक्र किया और दावा किया कि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि वे जानते हैं कि अनिल अंबानी को एपस्टीन से किसने मिलवाया था और इस मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी लिया। उनके इस बयान पर सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे बेबुनियाद बताया।
किसानों और व्यापार समझौतों पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों के कारण गरीब किसानों पर दबाव बढ़ेगा और आयात में भारी वृद्धि से देश की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका से आयात बढ़ने और टैरिफ संरचना में बदलाव से भारतीय किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी।
प्रधानमंत्री पर बाहरी दबाव के आरोप
इसके अलावा राहुल गांधी ने सरकार पर देश को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर बाहरी दबाव है और इसी कारण राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसले प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश को वैश्विक मंच पर बराबरी के आधार पर बातचीत करनी चाहिए, न कि किसी दबाव में आकर निर्णय लेने चाहिए।
प्रल्हाद जोशी का पलटवार और सबूत की मांग
राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल कागज दिखाकर किसी आरोप को प्रमाणित नहीं किया जा सकता और बिना ठोस सबूत के ऐसे बयान देना गलत है।
विपक्षी सांसदों का निलंबन और अविश्वास प्रस्ताव
वहीं, बजट सत्र के दौरान हंगामे के चलते निलंबित विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन पूरे सत्र तक जारी रखने का फैसला किया गया है। इनमें कांग्रेस के सात और सीपीएम के एक सांसद शामिल हैं। इन सांसदों पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप है। संसद के मौजूदा सत्र में विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी दिया गया है, जिस पर आने वाले समय में चर्चा हो सकती है।
बजट सत्र में बढ़ता सरकार-विपक्ष टकराव
कुल मिलाकर, लोकसभा का बजट सत्र इस बार तीखे आरोप-प्रत्यारोप, राजनीतिक टकराव और संवेदनशील मुद्दों पर गर्मागर्म बहस के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। आने वाले दिनों में विशेषाधिकार नोटिस, अविश्वास प्रस्ताव और सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव से संसद की कार्यवाही और अधिक गरमाने की संभावना है।









