
हरियाणा के पानीपत रिफाइनरी में मंगलवार को श्रमिक सुबह करीब 9:30 बजे से गेट नंबर-4 के बाहर धरना देकर बैठे थे। ये प्रदर्शन लंबे समय से लंबित मांगों के समर्थन में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें तय 8 घंटे की ड्यूटी के बजाय 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जबकि अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं दिया जा रहा।
इसके अलावा मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनकी सैलरी से पीएफ और ईएसआई के नाम पर कटौती की जा रही है, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी जाती।
CISF से कहासुनी के बाद बिगड़े हालात
दोपहर लगभग 1 बजे के आसपास प्रदर्शन कर रहे कुछ मजदूरों और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह मामूली कहासुनी जल्द ही झड़प में बदल गई। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग की ओर बढ़े और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
देखते ही देखते मौके पर पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे परियोजना स्थल के पास खड़ी कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचा। घटना के बाद रिफाइनरी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।
मौके पर पहुंची पुलिस, स्थिति पर पाया काबू
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर हालात को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका।
प्रशासन का कहना है कि श्रमिक नेताओं ने अपनी मांगों की लिखित सूची सौंपी है, जिस पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की जा रही है। फिलहाल रिफाइनरी परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
मजदूरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कई बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया है, जिनमें शामिल हैं:
- कार्यस्थल तक आने-जाने के लिए परिवहन सुविधा
- शौचालय और कैंटीन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं
- तय समय के अनुसार कार्य शिफ्ट
- ओवरटाइम का भुगतान
- वेतन से कटौती पर पारदर्शिता
मजदूरों का कहना है कि इन समस्याओं के चलते उन्हें रोजाना अतिरिक्त दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जिससे कार्य क्षमता और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।










