
Chabahar Port Project India and Iran, ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शुक्रवार को चाबहार बंदरगाह की रणनीतिक और आर्थिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ईरान इस परियोजना के माध्यम से भारत और अन्य देशों के साथ अपने व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजदूत फथाली ने कहा, “चाबहार बंदरगाह न केवल अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक संपर्कता प्रदान करता है, बल्कि यह मध्य एशिया के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा दे सकता है। हमारी कोशिश है कि इस क्षेत्र में भारत और अन्य सहयोगी देशों के साथ मजबूत और स्थायी संबंध बनाए जाएँ।”
चाबहार बंदरगाह की भूमिका
चाबहार बंदरगाह परियोजना की योजना इस दृष्टि से बनाई गई थी कि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों तक व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाए। फथाली ने बताया कि इस बंदरगाह के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क में सुधार होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास में भी मदद मिलेगी।
ईरान की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति
राजदूत ने यह भी बताया कि लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य अत्याधुनिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कठिन परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जिससे देश का आर्थिक और तकनीकी विकास तेजी से बढ़ा है।
अमेरिका की नीतियों में बदलाव और इसका प्रभाव
फथाली की यह टिप्पणी अमेरिकी नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों की पृष्ठभूमि में आई है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रतिबंधों में ढील और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव से ईरान को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने का अवसर मिल सकता है।










