
America’s massive military deployment in the Middle East, अमेरिका के दर्जनों C-17 और C-5 मिलिट्री कार्गो विमान लगातार मिडिल ईस्ट के सैन्य ठिकानों पर हथियार और सैन्य साजो-सामान उतार रहे हैं। इसी बीच USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य पूर्व पहुंच चुका है और फिलहाल उत्तरी अरब सागर में तैनात है। इस कैरियर के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और पूरा कैरियर एयर विंग मौजूद है, जिसमें F/A-18E सुपर हॉर्नेट, F-35C लाइटनिंग-II और EA-18G ग्राउलर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट्स के स्क्वाड्रन शामिल हैं। इसके अलावा USS डेल्बर्ट डी. ब्लैक, USS मैकफॉल और USS मिट्शर जैसे तीन अन्य डिस्ट्रॉयर भी क्षेत्र में सक्रिय हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में माइनस्वीपिंग की आशंका
CNN के मुताबिक, बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के तीन लिटोरल कॉम्बैट शिप—USS Santa Barbara, USS Canberra और USS Tulsa—को माइनस्वीपिंग ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। आशंका है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री मार्गों में माइंस बिछाई हों। इन्हें ट्रैक करने और निष्क्रिय करने के लिए USS Tulsa की तैनाती अहम मानी जा रही है।
ईरान को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए हैं। कतर की राजधानी दोहा स्थित अल-उदीद एयर बेस पर THAAD और Patriot मिसाइल डिफेंस सिस्टम देखे गए हैं, जिसकी पुष्टि 25 जनवरी की सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है, इसी खतरे को देखते हुए ये सिस्टम लगाए गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान शर्तें नहीं मानता तो अमेरिका का अगला हमला “काफी बुरा” होगा।
ईरान पर चौतरफा हमले की तैयारी
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन उत्तरी अरब सागर से ईरान पर हमला कर सकता है, जबकि अन्य गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी इस ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं। हर युद्धपोत दर्जनों टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइलों से लैस होता है, जिनकी रेंज 1000 मील से अधिक और वारहेड वजन लगभग 1000 पाउंड होता है। माना जा रहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई की शुरुआत टॉमहॉक मिसाइलों से ही होगी। इसके साथ ही अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ एक हमलावर पनडुब्बी भी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की जाती।
कतर में उतरा हाई-टेक E-11A विमान
CNN के अनुसार, गुरुवार को एक E-11A विशेष विमान कतर के अल-उदीद एयर बेस पर उतरा है। यह विमान पहले एक बिजनेस जेट था, जिसे अब सैन्य उपयोग के लिए बदला गया है। यह हाई-एल्टीट्यूड कम्युनिकेशन रिले सिस्टम की तरह काम करता है और हवाई व ज़मीनी बलों के बीच डेटा कोऑर्डिनेशन में अहम भूमिका निभाता है।
F-15E जेट्स और ड्रोन से समुद्री निगरानी
अमेरिका ने F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स का एक स्क्वाड्रन भी इस क्षेत्र में तैनात किया है, जो गाइडेड बम और हवा-से-ज़मीन मार करने वाली मिसाइलों से लैस है। इसके साथ ही अमेरिकी ड्रोन और RC-135 टोही विमान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में गश्त कर रहे हैं। RC-135 विमान न्यूक्लियर रेडिएशन का पता लगाने में सक्षम है।
स्पेन में एयर टैंकरों की तैनाती
हवाई ऑपरेशन को समर्थन देने के लिए कम से कम 8 अमेरिकी एयरक्राफ्ट टैंकर अटलांटिक महासागर पार कर स्पेन के मोरोन एयर बेस पहुंचे हैं। ये टैंकर फाइटर जेट्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट को हवा में ईंधन भरने में मदद करेंगे, जिससे लंबे सैन्य मिशन संभव हो सकें।
पहले भी हो चुका है ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला
जून 2025 में अमेरिका ने मिसौरी के वाइटमैन एयर फोर्स बेस से सात B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स को 37 घंटे के मिशन पर ईरान भेजा था। इस दौरान ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर एक दर्जन से ज्यादा बम गिराए गए थे। उस हमले में गाइडेड-मिसाइल पनडुब्बी का भी इस्तेमाल हुआ था। अमेरिकी नौसेना के पास ओहियो-क्लास की चार ऐसी पनडुब्बियां हैं, जो एक साथ 154 टॉमहॉक मिसाइलें ले जाने में सक्षम हैं।










