
Announcement of a moratorium on the collection of Trump’s Emergency Tariff, अमेरिका में राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने 1977 के कानून International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत वसूले जा रहे टैरिफ की वसूली रोकने का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने कहा है कि मंगलवार रात 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से इन टैरिफ की वसूली बंद कर दी जाएगी और संबंधित कोड कार्गो सिस्टम से हटा दिए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को ठहराया गैरकानूनी
तीन दिन पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने IEEPA के तहत अपनी शक्तियों का दायरा पार कर लिया था। कोर्ट के अनुसार, इस कानून के तहत इतने व्यापक स्तर पर आयात पर टैरिफ लगाना वैध नहीं था। इसके बाद सरकार को इन टैरिफ की वसूली रोकनी पड़ी। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक इस फैसले का बड़ा वित्तीय असर हो सकता है। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सरकार को लगभग 175 अरब डॉलर (करीब 15.75 लाख करोड़ रुपए) तक की रकम लौटानी पड़ सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन टैरिफ से रोजाना 50 करोड़ डॉलर से अधिक की आय हो रही थी। अब कंपनियां रिफंड की मांग कर सकती हैं, हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि पहले वसूली गई राशि वापस होगी या नहीं।
ट्रम्प की चेतावनी: ‘गेम खेलने वालों को भुगतना होगा’
टैरिफ रोकने के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कई देशों ने वर्षों तक अमेरिका को व्यापार में नुकसान पहुंचाया है। यदि कोई देश ट्रेड डील के नाम पर अमेरिका के साथ ‘गेम’ खेलने की कोशिश करेगा तो उसे और ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उनकी ताकत कम नहीं, बल्कि और बढ़ी है। उनके मुताबिक अदालत के निर्णय ने बाकी कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाने के रास्ते और स्पष्ट कर दिए हैं।
अब 15% ग्लोबल टैरिफ लागू
IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ भले ही रद्द कर दिए गए हों, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने तुरंत नया कदम उठाया है। अब अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 122 के तहत दुनियाभर से आने वाले सामान पर 15% का समान ग्लोबल टैरिफ लागू किया जा रहा है। सेक्शन 122, 1974 के ट्रेड एक्ट का हिस्सा है, जो राष्ट्रपति को अस्थायी रूप से अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। हालांकि इसे 150 दिनों से अधिक जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। पहले इसे 10% बताया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया।
भारत पर क्या असर?
भारत भी इस 15% ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आ गया है। पिछले एक वर्ष में भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ दरें कई बार बदली गईं—पहले लगभग 26%, फिर 50% तक, उसके बाद 18% और अब 15%। फिलहाल भारत को पहले की तुलना में कम दर का सामना करना पड़ेगा, लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी कांग्रेस 150 दिन की समयसीमा को बढ़ाती है या नहीं, और भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित अस्थायी व्यापार समझौता कब लागू होता है।
सेक्शन 232 और 301 जारी रहेंगे
यह आदेश केवल IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू है। राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए टैरिफ, जो 1962 के कानून के सेक्शन 232 के तहत आते हैं, जारी रहेंगे। इसी तरह 1974 के कानून के सेक्शन 301 के तहत ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ के मामलों में लगाए गए टैरिफ भी लागू रहेंगे। चीन के खिलाफ लगाए गए कई टैरिफ इसी प्रावधान के तहत थे।
किन उत्पादों को छूट?
नई 15% दर के बावजूद कुछ उत्पादों को छूट दी गई है। इनमें कुछ कृषि उत्पाद (जैसे बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह नया टैरिफ पुराने ढांचे की जगह लेगा और राजस्व बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा।
ऐतिहासिक संदर्भ
साल 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति Richard Nixon ने व्यापार असंतुलन से निपटने के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया था। बाद में इसी तरह की आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, जिसमें सेक्शन 122 शामिल किया गया।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि सेक्शन 122 के तहत लगाए गए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो कानूनी लड़ाई फिर शुरू हो सकती है। इसके अलावा, कंपनियां रिफंड के लिए दावा करती हैं या नहीं, यह भी बड़ा मुद्दा रहेगा।
कुल मिलाकर, अमेरिकी व्यापार नीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में है। भारत समेत कई देशों के लिए आने वाले 150 दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं, क्योंकि इसी अवधि में तय होगा कि 15% ग्लोबल टैरिफ स्थायी बनता है या फिर इसमें फिर बदलाव होता है।










