
For a saint nation and religion are paramount., प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस जारी किया है और चेतावनी दी है कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो मेले में प्रवेश पर रोक भी लगाई जा सकती है।
इस पूरे मामले में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी एंट्री हो गई है। बिना किसी का नाम लिए मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए व्यक्तिगत संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता, उसके लिए धर्म और राष्ट्र ही सर्वोपरि होते हैं।
सीएम योगी का बयान: धर्म ही योगी की असली संपत्ति
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “एक योगी या संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती, धर्म ही उसकी असली संपत्ति होती है और राष्ट्र उसका स्वाभिमान होता है।”
‘बहुत से कालनेमि हैं, सतर्क रहना होगा’
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जो लोग धर्म के खिलाफ आचरण करते हैं, वे धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,
“आज के समय में बहुत से कालनेमि हैं, ऐसे लोगों से सभी को सतर्क रहना होगा।”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस का दिया जवाब
इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए दूसरे नोटिस का जवाब दे दिया है। अपने जवाब में उन्होंने कहा कि
“पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जो आदि शंकराचार्य के काल से भी लगभग 2500 वर्ष पुरानी परंपरा है।”
उन्होंने प्रशासन पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया।
अनुयायियों से मारपीट और अपमान का आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उनके अनुयायियों के साथ मारपीट की गई, उन्हें अपमानित किया गया और अपराधियों की तरह व्यवहार किया गया। उन्होंने पुलिस पर पालकी घसीटने और सार्वजनिक रूप से परेड कराकर अपमानित करने का गंभीर आरोप भी लगाया।
‘धार्मिक भावना पर सीधा हमला’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि पालकी को जानबूझकर खतरनाक स्थान पर ले जाया गया और नदी में गिराने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने हत्या के प्रयास के समान बताया।
उन्होंने कहा,
“यह पूरी घटना धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला है।”
‘सरकार के पास बस बुलडोजर है’
मेले में शिविर हटाए जाने की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा,
“इस सरकार के पास बस एक बुलडोजर ही है। चाहें तो हमारे शिविर पर भी चला दें। हम वैसे भी फुटपाथ पर बैठे हैं।”
संतों के बयान पर भी पलटवार
कुछ संतों द्वारा उनके खिलाफ दिए गए बयानों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि
“वे सब सरकार और बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। उन्हें जैसा निर्देश मिलता है, वे वैसा ही बोलते हैं।”









