
Now MPs will be able to mark their attendance while sitting on their seats., लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कार्यप्रणाली को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए लोकसभा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत अब लोकसभा सांसद आगामी बजट सत्र से केवल अपनी निर्धारित सीटों से ही उपस्थिति (Attendance) दर्ज करा सकेंगे। पहले की तरह लॉबी से हाजिरी लगाने की व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है।
सदन चलेगा तभी दर्ज होगी सांसदों की उपस्थिति
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि अब सांसद तभी अपनी हाजिरी लगा पाएंगे जब सदन की कार्यवाही चल रही होगी। यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है—चाहे वह हंगामे की वजह से ही क्यों न हो—तो उस स्थिति में उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकेगी।
गौरतलब है कि बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो रहा है, और यह नया नियम उसी सत्र से लागू होगा।
बदलाव का मकसद: सक्रिय भागीदारी और अनुशासन
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांसदों की उपस्थिति केवल संसद परिसर में मौजूदगी तक सीमित न रहे, बल्कि सदन की कार्यवाही में उनकी सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित हो।
इसके लिए लोकसभा की हर सीट पर डिजिटल कंसोल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से सांसद अपनी सीट से ही हाजिरी दर्ज कर सकेंगे।
संसदीय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
ओम बिरला ने बताया कि यह सुधार संसदीय प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और विधायी सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संसद में गंभीरता और अनुशासन समय की आवश्यकता है।
नियमों में एकरूपता पर विचार करेगी समिति
लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने जानकारी दी कि संसद ने एक विशेष समिति गठित की है। यह समिति देश की सभी विधायी संस्थाओं—लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं—में नियमों और परंपराओं में एकरूपता लाने के तरीकों पर विचार करेगी।
उन्होंने राज्य विधानसभाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया और कहा कि इससे विधायी कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा को बताया जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक
सम्मेलन के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश विधानभवन के मंडप में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विषय पर मिलने वाले सुझावों के आधार पर जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।










