
Voting ink controversy in Mumbai BMC elections 2026, महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के लोकल बॉडी चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS चीफ राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि वोटर की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही आसानी से मिटाई जा रही है, जिससे कुछ लोग दोबारा वोट डाल सकते हैं। यह आरोप चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर तीखा हमला
उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “शायद यह पहला चुनाव है जहां वोटिंग के बाद लगाई गई स्याही तुरंत उतर रही है। यह रूलिंग पार्टी और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का सबूत है। ऐसे में चुनाव में धोखाधड़ी की पूरी संभावना बनती है।” उन्होंने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की और सवाल उठाया कि क्या वोटर की स्याही हटाने के लिए कोई ‘सैनिटाइजर एजेंसी’ हायर की गई थी।
राज ठाकरे ने उठाया दोबारा वोट डालने का आरोप
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पुराने इंक की जगह नया मार्कर पेन इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर कोई हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करता है, तो स्याही तुरंत मिट जाती है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान कर सकता है।” ठाकरे ने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की।
चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्शन कमीशन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मार्कर पेन का इस्तेमाल वोटरों की उंगलियों पर निशान लगाने के लिए साल 2011 से किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय प्रक्रिया है और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का पलटवार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हर चुनाव में वही स्याही इस्तेमाल होती रही है। हर छोटी-छोटी बात पर हंगामा करना उचित नहीं है। चुनाव आयोग निष्पक्ष और सतर्क है।” उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा, “महाराष्ट्र में लोकल बॉडी चुनाव पूरी तरह फ्री और फेयर हो रहे हैं। चुनाव आयोग ने हर कदम पर सावधानी बरती है ताकि कोई फ्रॉड वोटिंग न हो। यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।”
आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज
इस विवाद के बीच, राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज है। विपक्षी पार्टियां चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, जबकि राज्य चुनाव आयोग और सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीतिक सुर्खियों में बना हुआ है।










