Vande Mataram के 150 वर्ष,  हम सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी : PM MODI

Vande Mataram के 150 वर्ष,  हम सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी : PM MODI
वंदे मातरम् के 150 वर्ष,  हम सभी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी : PM MODI

आज लोकसभा में देश के राष्ट्रीय गीत Vande Mataram के 150 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा की शुरुआत की और कहा कि यह सिर्फ बहस नहीं, बल्कि एक ऐसे मंत्र का सम्मान है जिसने भारत की आजादी की लड़ाई में ऊर्जा और चेतना का प्रवाह किया।

संसद में हुआ मजेदार पल

पीएम मोदी जब वंदे मातरम् पर अपना संबोधन दे रहे थे, तभी एक विपक्षी सांसद ने बीच में कुछ कह दिया। इस पर प्रधानमंत्री ने हंसते हुए कहा—

“दादा, आपकी तबीयत तो ठीक है ना? कभी-कभी उम्र में ऐसा हो जाता है।”

इस मजाक पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।

“Vande Mataram सिर्फ गीत नहीं, आजादी की आत्मा है”—PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा—

“जिस जयघोष ने स्वतंत्रता संग्राम में देशवासियों को त्याग, सेवा और समर्पण की प्रेरणा दी, उस Vande Mataram के 150 वर्ष पूरे होने पर इस सदन में इसका स्मरण हमारा सौभाग्य है।”

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ही वह आवाज थी जिसने 1947 में भारत को स्वतंत्रता दिलाई। इस गीत ने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक हर भारतीय के दिल में आजादी की लौ जगाई।

बंकिम चंद्र चटोपाध्याय से आज तक

पीएम मोदी ने बताया कि Vande Mataram की रचना वर्ष 1875 में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने की थी। यह वह समय था जब 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज शासन भारत पर कठोर दमन और षड्यंत्र कर रहा था।

“जिस समय ब्रिटिश शासन अपने राष्ट्र गीत को भारतीयों पर थोपने की कोशिश कर रहा था, उसी समय बंकिम बाबू ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया और Vande Mataram जैसी अमर रचना लिखी।”

आपातकाल और गुलामी का संदर्भ

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा कई ऐतिहासिक मोड़ों से गुजरी है—

जब इस गीत के 50 वर्ष हुए, तब भारत गुलामी में था।

जब 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।

उन्होंने कहा—

“दुर्भाग्य से जब वंदे मातरम 100 वर्ष का हुआ, तब देशभक्ति की आवाज़ उठाने वालों को जेल की सलाखों में डाल दिया गया था।”

आज का दिन गौरव का अवसर: पीएम

पीएम मोदी ने कहा—

“आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि उस महान अध्याय को पुनर्स्थापित करने का क्षण है जिसने भारत को आज़ादी दिलाई।”

लोकसभा में आज का दिन ऐतिहासिक रहा। वंदे मातरम् को सिर्फ याद नहीं किया गया, बल्कि उसे राष्ट्रीय चेतना, आजादी और सम्मान की प्रतीक भावना के रूप में दोबारा स्थापित किया गया।

Pradeep Dabas

Writer & Blogger

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