
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 13 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में 7.052 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 709.76 अरब डॉलर (या 709.759 अरब डॉलर) रह गया। यह लगातार दूसरी साप्ताहिक कमी है। इससे पहले वाले सप्ताह (6 मार्च को समाप्त) में भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर पर पहुंचा था, जबकि फरवरी के अंत में यह रिकॉर्ड उच्च स्तर 728.49 अरब डॉलर पर था।
रुपये को बचाने के लिए RBI ने डॉलर की बिकवाली की
इस गिरावट का प्रमुख कारण RBI की ओर से रुपये की रक्षा के लिए मुद्रा बाजार में डॉलर की भारी बिकवाली रही। विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Assets) में सबसे ज्यादा 7.678 अरब डॉलर की कमी आई, जो घटकर 555.568 अरब डॉलर रह गई। यह आंकड़ा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं के मूल्य परिवर्तन को भी दर्शाता है। वहीं, गोल्ड रिजर्व में 664 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 130.681 अरब डॉलर पर पहुंच गया। स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 23 मिलियन डॉलर की कमी आई, जो 18.697 अरब डॉलर रह गया। IMF में रिजर्व पोजीशन भी 15 मिलियन डॉलर घटकर 4.814 अरब डॉलर पर आ गया।
रुपये की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई
गिरावट की मुख्य वजहें भू-राजनीतिक तनाव हैं। मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती तथा यील्ड्स में बढ़ोतरी ने रुपये पर भारी दबाव डाला। रुपये की कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई, जिसके कारण RBI को हस्तक्षेप करना पड़ा। विशेषज्ञों के मुताबिक, RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे ताकि मुद्रा अस्थिरता, मुद्रास्फीति और पूंजी बहिर्वाह को नियंत्रित किया जा सके। मार्च में विदेशी निवेशकों की इक्विटी से निकासी भी इस दबाव को बढ़ावा दे रही है।
मानी जा रही है अस्थायी गिरावट
हालांकि, यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत स्थिति में है। यह 11 महीने से अधिक के मर्चेंडाइज आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है और बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है। फरवरी के रिकॉर्ड स्तर से कुल 18-19 अरब डॉलर की कमी आई है, लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि यदि तेल कीमतें स्थिर रहें और भू-राजनीतिक तनाव कम हो, तो भंडार में रिकवरी संभव है। RBI निरंतर निगरानी रख रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे हस्तक्षेप कर सकता है। कुल मिलाकर, यह घटना वैश्विक अनिश्चितताओं को उजागर करती है, लेकिन भारत की बाहरी स्थिति मजबूत बनी हुई है।









