
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के आज 22 वें दिन सुबह अमेरिका और इजराइल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हवाई हमला कर दिया । इससे पहले भी 2 मार्च को नतांज पर हमला किया गया था । यह ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर सेंटर है, यहां यूरेनियम इनरिचमेंट किया जाता है। इस हमले में अभी तक किसी भी तरह का रेडियोएक्टिव (खतरनाक परमाणु) रिसाव नहीं हुआ है । नतांज प्लांट की सबसे एक खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बना हुआ है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी हमले से इसे बचायाअमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के आज 22 वें दिन सुबह अमेरिका और इजराइल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हवाई हमला कर दिया । इससे पहले भी 2 मार्च को नतांज पर हमला किया गया था । यह ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर सेंटर है, यहां यूरेनियम इनरिचमेंट किया जाता है। इस हमले में अभी तक किसी भी तरह का रेडियोएक्टिव (खतरनाक परमाणु) रिसाव नहीं हुआ है । नतांज प्लांट की सबसे एक खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बना हुआ है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी हमले से इसे बचाया जा सके । जा सके ।
अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की सैन्य-परमाणु क्षमता को बुरी तरह कमज़ोर किया है, लेकिन ईरान अब लंबी दूरी के हमलों से जवाब दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “युद्ध को कम करने” (winding down) की बात कर रहे हैं, पर कोई ceasefire नहीं दिख रहा। आज की सबसे बड़ी खबर – ईरान ने डिएगो गार्सिया (अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डा) पर पहली बार इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं!
आज (21 मार्च 2026) की प्रमुख घटनाएँ और अपडेट्स
ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें डिएगो गार्सिया (लगभग 4000 किमी दूर) की ओर दागीं। एक मिसाइल बीच रास्ते में फेल हो गई, दूसरी को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। यह ईरान की अब तक की सबसे लंबी दूरी की स्ट्राइक है – युद्ध अब क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा!
इज़राइल पर ईरान की मिसाइल और ड्रोन बारिश जारी – आज तेल अवीव और यरुशलम के पास (अल-अक्सा मस्जिद के नज़दीक) एक मिसाइल गिरी। इज़राइली सेना ने ज्यादातर को इंटरसेप्ट किया, लेकिन कुछ नुकसान हुआ।
लेबनान में इज़राइली हमलों से 20+ मौतें, हिज़बुल्लाह के कई लड़ाके मारे गए।
ट्रंप ने NATO सहयोगियों को फिर “कायर” कहा – कहा, “हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना आसान है, मदद करो वरना तेल की कीमतें और बढ़ेंगी!” उन्होंने “winding down” (युद्ध कम करने) पर विचार करने की बात कही, लेकिन “decisive end” (निर्णायक अंत) की मांग भी दोहराई।
पेंटागन ने ईरान में ग्राउंड ट्रूप्स भेजने की तैयारियाँ तेज़ कीं – 82nd Airborne Division के कुछ हिस्सों को मिडिल ईस्ट भेजने की प्लानिंग। ट्रंप पहले ग्राउंड ट्रूप्स से इनकार कर चुके थे, अब U-टर्न!
अमेरिका ने ईरान के 140 मिलियन बैरल ऑयल पर सैंक्शंस हटाए (ग्लोबल प्रेशर के बाद), लेकिन तेल की कीमतें अभी भी $110+ पर। हॉर्मुज में शिपिंग खतरे में – 20% वैश्विक तेल का रास्ता प्रभावित।
ईरान ने धमकी दी – “दुश्मन देशों के पर्यटन स्थलों, मनोरंजन जगहों और अधिकारियों को निशाना बना सकते हैं।” ग्लोबल टूरिस्ट स्पॉट्स पर खतरा!
नेतन्याहू ने ट्रंप की बात मानी – ईरान के प्रमुख एनर्जी साइट्स (जैसे साउथ पार्स) पर आगे हमला नहीं करेंगे। उन्होंने दावा किया, “ईरान अब यूरेनियम संवर्धन या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता खो चुका है।”
मानवीय और आर्थिक त्रासदी:
ईरान में 18,000+ घायल, हजारों मौतें। लेबनान में लाखों विस्थापित।
गाजा और लेबनान में मदद रुक गई – बॉर्डर बंद।
वैश्विक बाजार हिल गए – स्टॉक गिरावट, पेट्रोल-डीजल महंगा। भारत में भी असर – पेट्रोलियम मंत्रालय ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें बढ़ाईं।
क्या होगा आगे ?
ट्रंप कह रहे हैं – “युद्ध मिलिट्री तौर पर जीत लिया, लेकिन decisive अंत चाहिए।” ईरान का नया लीडरशिप (मोहताबा खामेनी) अंदरूनी कलह में फंसा है। अमेरिका हजारों मरीन और एयर फोर्स भेज रहा है। ईरान की मिसाइल क्षमता कमज़ोर हुई, लेकिन जवाबी हमले और लंबी रेंज स्ट्राइक्स से डर बढ़ा।
यह युद्ध अब सिर्फ मध्य पूर्व का नहीं – वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है। ट्रंप “soon end” कहते हैं, लेकिन ग्राउंड ट्रूप्स और लंबी मिसाइल हमलों से लगता है – आग अभी बुझने वाली नहीं।









