मां देवी भगवती आदिशक्ति का चमत्कारी मंत्र करेगा आपकी सभी मनोकामना पूर्ण

Maan devi Bhagavati aadishakti

Maan devi Bhagavati aadishakti का वो चमत्कारी मंत्र जो न केवल जगत के कल्याण के लिए लाभकारी है बल्कि इंसान के भीतर पैदा हो रही नकारात्मक शक्तियों का विनाश करता है । जीवन को सुखमय बना देता है। परोपकार के लिए जो कोई भी व्यक्ति इस मंत्र की साधना शुरू करता है मां देवी भगवती उसके सभी कष्टों का निवारण करके अपना सामिप्य प्रदान करती है। इस मंत्र का जाप किसी भी महीने के शुक्लपक्ष की पंचमी या अष्टमी तिथि से शुरू कर सकते हैं तभी इस मंत्र के जप का पूर्ण फल मिलता है । यदि आप गृहस्थ हैं तो आपके लिए प्रतिदिन मंत्र की एक माला यानी 108 बार जाप बहुत है। ज्यादा आप जितना चाहे कर सकते हैं । मंत्र का जाप निरंतर होना चाहिए ऐसा नही हो कि जब शुरू कर दो और जब मर्जी छोड़ दो । Maan devi Bhagavati aadishakti ka chamatkari mantra karega aapaki sabhi manokamna puran

इस मंत्र जाप के समय एक सावधानी या चेतावनी जरूर है कि आप किसी का न तो बुरा चाहोगे और न ही करोगे , ईर्ष्या द्वेष जलन की भावना को खत्म करना पड़ेगा ।

मां देवी भगवती आदिशक्ति Maan devi Bhagavati aadishakti का चमत्कारी मंत्र

ओम् नमो देवी भगवती आदिशक्ति नमो नम:

जाप : एक माला या108 बार

समय : वैसे तो मंत्र जाप का समय बर्ह्म मुहूर्त सबसे उतम माना गया है । यदि उस समय मंत्र जाप नहीं कर पा रहे हैं तो किसी भी समय कर सकते हैं । मंत्र का जाप हाथों की अंगुलियों पर भी कर सकते हैं। संतों का कहना है कि जो भी व्यक्ति अंगुलियों पर जाप करता है उसका महत्व सबसे अधिक होता है । कहते हैं जब भगवान के घर जाओगे और भगवान पूछेंगे कि तुमने मुझे याद किया तो आप कहेंगे मैंने अंगुलियों पर आपको याद किया है।

Maan devi Bhagavati aadishakti, मंत्र जाप कैसे करें

वाचिक जप, जो बोलकर किया जाता है जिसमें मंत्र की ध्वनि आसपास के लोगों को सुनाई देती है। दूसरे उपांशु जप, जिसमें जीभ बंद करके, बिना ध्वनि उत्पन्न किए मंत्र का जाप किया जाता है । तीसरे मानसिक जप, जिसमें जीभ भी नहीं हिलती, कोई ध्वनि नहीं होती, जप मन में चलता रहता है। उपांशु जप वाचिक जप से दस गुना अधिक प्रभावी है, जबकि मानसिक जप वाचिक जप से सौ गुना अधिक प्रभावी है। चौथा होता है अजपा जप, जिसमें बिना गिनती किए, प्रत्येक सांस के साथ स्वेच्छा से जप किया जाता है। यह साधना की एक चरम अवस्था है, जिसका अर्थ है निरंतर जप। सांसारिक व्यक्तियों के लिए अजपा जप काफी कठिन होता है उनके लिए पहले तीन तरह के जाप आसान है ।

Sunita Malik

Writer & Blogger

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