
मिडिल-ईस्ट में जारी टेंशन ने नई रफ्तार पकड़ ली है। अमेरिका और इजराइल ने दक्षिणी ईरान में स्थित साउथ पार्स गैस फील्ड और असालुयेह शहर की तेल-गैस सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक की है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में गैस, पेट्रोकेमिकल और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले का महत्व
साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड माना जाता है। इस क्षेत्र पर हमले से न सिर्फ ईरान की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि वैश्विक तेल और गैस बाजार में भी उथल-पुथल आने की संभावना है।
इजराइल की रणनीति और बयान
इजराइल के रक्षा मंत्री ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान और लेबनान में “बड़े सरप्राइज” देखने को मिलेंगे। विशेषज्ञ इसे इन एयरस्ट्राइक से जोड़कर देख रहे हैं। इजराइली मीडिया ने भी बुशेहर क्षेत्र में गैस फैसिलिटी पर हमले की पुष्टि की है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने खाड़ी देशों में बड़े हमलों की चेतावनी जारी की है। IRGC ने नागरिकों से सऊदी अरब, UAE और कतर के प्रमुख तेल और गैस ठिकानों से दूर रहने की अपील की है। वहीं, कतर ने ईरान के गैस फील्ड पर हमले की कड़ी निंदा की है।
मिडिल-ईस्ट टेंशन के वैश्विक असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमले न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी कीमतों में तेजी ला सकते हैं। इस स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मिडिल-ईस्ट में संघर्ष की आग तेज हो रही है और अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर इसका गंभीर असर पड़ने की संभावना है।









