
Yogi Adityanath, आज संविधान निर्माता डॉं भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि है। आज Baba Saheb Ambedkar की पुण्यतिथि के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जहां भी Baba Saheb के सम्मान में लगी मूर्तियां हैं, वहां अक्सर शरारती तत्व नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। अब कोई भी शरारती और असामाजिक तत्व बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्तियों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ और तोड़फोड़ नहीं कर पाएंगे । ऐसी होगी मूर्तियों की सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था ।
मूर्तियों की सुरक्षा के लिए बनेगा विशेष सिस्टम
सीएम Yogi Adityanath ने बताया कि अब सरकार इन मूर्तियों की सुरक्षा के लिए एक विशेष सिस्टम बनाएगी। इसमें बाउंड्री वॉल का निर्माण और मूर्तियों के ऊपर कैनोपी लगाना शामिल होगा, ताकि बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्तियों की सुरक्षित और सम्मानजनक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा, Yogi Adityanath ने कहा कि हर झुग्गी-झोपड़ी, दलित बस्ती, अनुसूचित जाति और आदिवासी बस्तियों को सही कनेक्टिविटी और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने का प्रोग्राम पूरा करेगी।
संविधान और Baba Saheb पर गर्व
Yogi Adityanath ने कहा, “हमें अपने संविधान और Baba Saheb पर हम गर्व करते हैं। बाबा साहेब ने हमेशा हमें चेतावनी दी थी कि जो व्यक्ति भारत की मिट्टी को पवित्र नहीं मानता, वह देश के हित में काम नहीं कर सकता।”
योगी आदित्यनाथ ने यह भी बताया कि सरकार कॉर्पोरेशन के जरिए अगले 1-2 महीनों में क्लास IV कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करेगी। उनका यह कदम ज़ीरो पॉवर्टी अभियान का हिस्सा है, जो पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए काम करेगा।
सामाजिक न्याय के महान व्यक्तित्व थे Baba Saheb
भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के महान व्यक्तित्व और समानता के प्रबल समर्थक डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक क्रांति का नाम हैं जिसने भारत की सोच और व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया।
जिस दौर में उन्होंने जन्म लिया, उस समय अस्पृश्यता, भेदभाव और सामाजिक असमानता अपने चरम पर थी। लेकिन डॉ. आंबेडकर ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत, ज्ञान को अपना हथियार और संघर्ष को अपना जीवन सिद्धांत बनाया। वे सिर्फ एक वकील या अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि राजनीति, मानवाधिकार, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण के सबसे मजबूत स्तंभ थे।
Baba Saheb का संदेश
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”
सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसी दिशा है जो आने वाली हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की सोच और विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे। उनकी विरासत न्याय, समानता और मानव गरिमा का वह प्रकाश स्तंभ है जो आने वाली सदियों तक मार्गदर्शन देता रहेगा।
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