
War breaks out between Pakistan and Afghanistan, 55 Pakistani soldiers killed and 19 posts captured ? अफगानिस्तान द्वारा पाकिस्तान पर किए गए ताजा हमलों ने दोनों देशों को सीधे सैन्य टकराव की स्थिति में ला खड़ा किया है। डूरंड लाइन पर अफगान बलों की आर्टिलरी और पैदल सेना की कार्रवाई के बाद हालात बेकाबू हो गए। अफगानिस्तान का दावा है कि उसके जवाबी हमलों में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है और कई सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया गया है। इसके बाद पाकिस्तान ने भी बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया, जिससे सीमा पर जंग जैसे हालात बन गए।
अफगानिस्तान का दावा : 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे, 19 चौकियों पर कब्ज़ा
तालिबान सरकार के अनुसार, सीमा क्षेत्र में की गई कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 13 पाक सैनिकों के शव पाकिस्तान को लौटाए गए, जबकि कुछ को जिंदा पकड़ा गया है। तालिबान प्रवक्ता Zabihullah Mujahid के मुताबिक, अफगान बलों ने डूरंड लाइन पर कम से कम 15 पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है।
वहीं सोशल मीडिया हैंडल X पर तथाकथित डूरंड लाइन के साथ, इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान ने 203 मंसूरी कोर और 201 खालिद बिन वालिद कोर के माध्यम से कहा गया कि पक्तिया, पक्तिका, खोस्त, कुनार, नूरिस्तान, नंगरहार प्रांतों और तोरखम गेट के विभिन्न स्थानों पर दुश्मन के खिलाफ भारी जवाबी हमले शुरू किए हैं। अब तक, पाकिस्तान के एक मुख्यालय और उन्नीस चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है, चार चौकियों को खाली करा लिया गया है और उन पर पूरी तरह से आग लगा दी गई है। लगभग पचपन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जिनमें से तेईस शव और कई अन्य को मुजाहिदीन ने जिंदा पकड़ लिया है। दर्जनों हल्के और भारी हथियार जब्त किए गए हैं, एक टैंक नष्ट कर दिया गया है और एक अंतरराष्ट्रीय हार्वेस्टर वाहन भी जब्त किया गया है। जवाबी हमले अभी भी जारी हैं। अफगान पक्ष का कहना है कि कई पाकिस्तानी हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किए गए हैं और सीमा पर रणनीतिक बढ़त बनाई जा रही है।
पाकिस्तान का पलटवार: ‘ग़ज़ब लिल हक’ ऑपरेशन
अफगान हमलों के बाद पाकिस्तान ने ‘ग़ज़ब लिल हक’ नाम से सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में 130 से अधिक अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। पाकिस्तान का दावा है कि उसने काबुल, पक्तिका और कंधार में तालिबान के डिफेंस ठिकानों को निशाना बनाया। दो कोर हेडक्वार्टर, तीन ब्रिगेड मुख्यालय, दो एम्युनिशन डिपो और कई बटालियन स्तर की पोस्ट तबाह करने का दावा किया गया है। हालांकि, अफगानिस्तान ने इन दावों को झूठा बताया है।
काबुल और बॉर्डर इलाकों में धमाके
रिपोर्ट्स के अनुसार, काबुल में देर रात कई धमाकों और लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनी गईं। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने नंगरहार और पक्तिका प्रांत में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत की पुष्टि की थी। नंगरहार, कुनार, खोस्त और कुर्रम जैसे सीमावर्ती इलाकों में भारी फायरिंग जारी रहने की खबर है। आर्टिलरी और मोर्टार के इस्तेमाल से स्थानीय नागरिकों में डर का माहौल है।
खुली जंग की चेतावनी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा है कि सीमा पर लगातार हमलों ने “सब्र की हद पार कर दी है” और अब खुली जंग की स्थिति बन रही है। उन्होंने तालिबान सरकार पर पाकिस्तान विरोधी तत्वों को समर्थन देने का आरोप लगाया। वहीं अफगानिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई और वह अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
जड़ में डूरंड लाइन और TTP मुद्दा
विशेषज्ञों के मुताबिक, संघर्ष की पृष्ठभूमि में डूरंड लाइन का पुराना विवाद और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा शामिल है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगान जमीन से उसके खिलाफ हमले होते हैं, जबकि तालिबान इन आरोपों को खारिज करता है। दोनों देशों के बीच चल रहा यह सैन्य टकराव अब सूचना युद्ध का रूप भी ले चुका है, जहां दावों और जवाबी दावों की भरमार है लेकिन स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
उल्लेखनीय
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांत में 21-22 फरवरी की दरमियानी रात एयर स्ट्राइक की थी। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने पुष्टि की थी कि इन हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इन्हीं घटनाओं के बाद सीमा पर तनाव और बढ़ गया और हालात खुले सैन्य टकराव में बदल गए।
सउदी अरब की शरण में पहुंचा पाकिस्तान
तालिबान के साथ तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब से तुरंत संपर्क साधा है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के प्रभारी Ishaq Dar ने सऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud से फोन पर बातचीत की। सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के रास्ते तलाशना था। यह बातचीत काबुल में एयरस्ट्राइक के बाद हुई। खास बात यह है कि इशाक डार इस समय Jeddah में Organisation of Islamic Cooperation की बैठक में शामिल होने पहुंचे हुए हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग है। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में यदि पाकिस्तान-तालिबान संघर्ष बढ़ता है तो सऊदी की भूमिका अहम हो सकती है। सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता की कोशिश करता रहा है। हाल ही में उसकी पहल पर अफगानिस्तान ने तीन पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा किया था। इसके अलावा सऊदी और तालिबान के बीच लगभग 40 मिलियन डॉलर का व्यापार होता है, जबकि 2021 से 2024 के बीच सऊदी ने मानवीय सहायता के तौर पर करीब 70 मिलियन डॉलर की मदद दी है।
रूस की सख्त अपील: तुरंत रुके अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर रूस ने गंभीर चिंता जताते हुए दोनों देशों से तत्काल संघर्ष विराम की अपील की है। रूसी समाचार एजेंसी RIA Novosti के अनुसार, मॉस्को ने स्पष्ट कहा है कि हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए हमले तुरंत बंद किए जाएं और मतभेदों का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से निकाला जाए। रूस ने यह भी संकेत दिया है कि यदि दोनों देश चाहें तो वह मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। मॉस्को का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी सक्रिय हो गया है। United Nations के अफगानिस्तान के लिए विशेष प्रतिवेदक Richard Bennett ने दोनों देशों से संयम बरतने और तुरंत डी-एस्केलेशन की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात दुर्भाग्यपूर्ण रूप से हिंसा में बदलते दिख रहे हैं और इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ सकता है। बेनेट ने जोर देकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए और तनाव को बढ़ने से रोकना ही प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए।
ईरान का प्रस्ताव: रमजान के मौके पर संवाद से निकले समाधान
इस बीच ईरान ने भी मध्यस्थता की पेशकश की है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि रमजान के पवित्र महीने में दोनों पड़ोसी देशों को आपसी मतभेद संवाद और अच्छे संबंधों के जरिए सुलझाने चाहिए। तेहरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रमजान आत्मसंयम और इस्लामी एकता का प्रतीक है, ऐसे में संघर्ष के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना समय की मांग है। ईरान ने यह भी दोहराया कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बातचीत को आसान बनाने और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए हर संभव मदद देने को तैयार है।










