
Vijay’s film ‘Jana Nayakan’ embroiled in CBFC controversy, तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ की रिलीज को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब केवल सिनेमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीति, केंद्र बनाम राज्य सरकार और CBFC (सेंसर बोर्ड) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं । इस पूरे विवाद के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र की बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि जैसे ED, CBI और IT का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है, उसी तरह अब CBFC को भी राजनीतिक हथियार बना दिया गया है।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर बिना फिल्म का नाम लिए लिखा कि, “अब सेंसर बोर्ड भी बीजेपी सरकार का नया हथियार बन गया है, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं।”
‘जना नायकन’ क्यों है इतनी अहम फिल्म?
‘जना नायकन’ अभिनेता विजय के करियर की अंतिम फिल्म मानी जा रही है। इसके बाद विजय पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय होने जा रहे हैं। यही वजह है कि इस फिल्म को लेकर फैंस से लेकर राजनीतिक हलकों तक भारी उत्सुकता बनी हुई है। एच. विनोद द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विजय, प्रकाश राज, पूजा हेगड़े, मामिता बैजू जैसे दिग्गज कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म की रिलीज डेट 9 जनवरी तय की गई थी, लेकिन कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह तारीख अब बेअसर हो चुकी है।
CBFC से शुरू हुआ विवाद कैसे बढ़ा ?
फिल्म को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को सीधे सर्टिफिकेट देने के बजाय उसे रिव्यू कमेटी के पास भेजने का फैसला किया। फिल्म निर्माताओं का आरोप था कि यह फैसला अनावश्यक और राजनीतिक दबाव में लिया गया । इसके बाद फिल्म बनाने वाली कंपनी KVN प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की और मांग की कि CBFC को तुरंत फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया जाए।
सिंगल जज का फैसला: CBFC को झटका
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पीटी आशा ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि, “जब सेंसर बोर्ड फिल्म को सर्टिफिकेट देने का फैसला कर चुका था, तो CBFC चेयरपर्सन के पास उसे रिव्यू कमेटी के पास भेजने का कोई अधिकार नहीं था।” इस आदेश में CBFC को निर्देश दिया गया कि वह तुरंत फिल्म को मंजूरी दे। इस फैसले को फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत माना गया।
हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने लगाई रोक
हालांकि, CBFC ने इस फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर डिविजन बेंच में अपील दाखिल कर दी इस बीच मद्रास हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सिंगल जज ने CBFC को फिल्म ‘जना नायकन’ को तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया था । चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की बेंच ने CBFC की अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद फिल्म की रिलीज पूरी तरह अधर में लटक गई है और विजय के प्रशंसकों में भारी नाराजगी देखी गई।
केंद्र सरकार की दलीलें क्या हैं ?
डिविजन बेंच में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBFC की ओर से दलील दी कि फिल्म में सेना से जुड़े संवेदनशील संदर्भ और धार्मिक भावनाओं से संबंधित दृश्य शामिल हैं, इसलिए CBFC चेयरपर्सन को फिल्म को रिव्यू पैनल के पास भेजने का पूरा अधिकार था । केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि सिंगल जज ने CBFC को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।
राजनीति और सिनेमा का टकराव
इस विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या CBFC एक स्वतंत्र संस्था है या राजनीतिक दबाव में काम कर रही है? क्या विजय की बढ़ती राजनीतिक लोकप्रियता से केंद्र सरकार असहज है? और क्या आने वाले समय में फिल्मों की रिलीज भी राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगी ? विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दक्षिण भारतीय राजनीति बनाम केंद्र सरकार की लड़ाई का नया अध्याय बन सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल ‘जना नायकन’ की रिलीज पर कोर्ट की रोक लगी हुई है। अगली सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि फिल्म को कब और किस शर्त पर रिलीज की अनुमति मिलती है। लेकिन इतना तय है कि विजय की आखिरी फिल्म अब एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रतीक बन चुकी है।









