
मध्य पूर्व में हालात अचानक बेहद विस्फोटक हो गए हैं। इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर तबाही की खबरें सामने आई हैं। ईरान के लिए सबसे दुखद खबर यह रही कि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। उनके साथ ही हमले में उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती समेत कॉम्प्लेक्स में मौजूद 40 कमांडर्स भी मारे गए हैं।
बता दें कि खामनेई के ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर शनिवार को मिसाइलों से हमला हुआ था। हमले के समय खामनेई कमांडर्स के साथ मीटिंग कर रहे थे। इजराइल के प्रधानमंती नेतन्याहू ने शनिवार देर रात खामनेई के मारे जाने की बात कही थी। इसके कुछ देर बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी उनके मारे जाने का दावा किया था। रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने इसकी पुष्टि की। खामनेई के मारे जाने पर ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक मना रहा है।’
1200 बमों की बरसात और बड़ा सैन्य ऑपरेशन
इजराइली वायु सेना का दावा है कि पिछले 24 घंटों में ईरान के अलग-अलग सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर 1,200 से ज्यादा बम गिराए गए। राजधानी तेहरान सहित कम से कम 10 बड़े शहर निशाने पर रहे। बताया जा रहा है कि खामेनेई जिस ऑफिस कॉम्प्लेक्स में वरिष्ठ कमांडरों के साथ बैठक कर रहे थे, उस पर करीब 30 मिसाइलें दागी गईं। इस हमले में उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मारे गए।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देर रात बयान जारी कर खामेनेई के मारे जाने की बात कही। कुछ ही देर बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी दावा किया कि यह हमला ईरान की सैन्य क्षमता को तोड़ने के लिए जरूरी था।
ईरान में तबाही और गुस्सा
हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से बड़ी संख्या में छात्राओं की जान गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे “शहादत” बताया और बदला लेने की कसम खाई। सरकारी मीडिया में लगातार बयान आ रहे हैं कि अब तक का “सबसे खतरनाक अभियान” शुरू किया जाएगा।
ईरान का पलटवार: 9 देशों पर हमले
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल पर सैकड़ों मिसाइलें दागीं। तेल अवीव में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और गाड़ियों में आग लग गई। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। दुबई के जेबेल अली पोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने खाड़ी क्षेत्र में दहशत फैला दी।
कतर की राजधानी दोहा और इराक के इरबिल एयरबेस के पास भी धमाकों की सूचना मिली है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
दुनिया पर असर: तेल बाजार में उथल-पुथल
मध्य पूर्व वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा देता है। हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फिलहाल सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन तनाव बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
खामेनेई कौन थे?
अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 1939 में मशहद में हुआ था। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे सत्ता के केंद्र में आए। 1981 में राष्ट्रपति बने और 1989 में आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद देश के सर्वोच्च नेता नियुक्त हुए। तीन दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने ईरान की राजनीति, सेना और विदेश नीति पर निर्णायक प्रभाव रखा।
उनके समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का संरक्षक मानते थे, जबकि आलोचक उन पर कठोर शासन और असहमति को दबाने के आरोप लगाते रहे।
अब ईरान की कमान किसके हाथ?
खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा। ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, जब तक नया सर्वोच्च नेता नहीं चुना जाता, तब तक एक अस्थायी परिषद देश की जिम्मेदारी संभालती है। इस परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल का एक वरिष्ठ धर्मगुरु शामिल होते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स यह भी दावा कर रही हैं कि एक्सपर्ट असेंबली ने पहले ही उत्तराधिकारी पर सहमति बना ली थी।
क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब, कतर, UAE और इराक जैसे देश सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। पाकिस्तान और कश्मीर में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं। कराची में अमेरिकी दूतावास के पास हिंसा में कई लोगों की मौत हुई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। अमेरिका की कोशिश है कि हालात पूर्ण युद्ध में न बदलें, जबकि ईरान बदले की भाषा बोल रहा है।
क्या बढ़ेगा युद्ध का दायरा?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान ने बड़े पैमाने पर अमेरिकी ठिकानों या इजराइल पर हमले तेज किए, तो संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में फैल सकता है। इससे न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक संकट भी गहरा सकता है।
फिलहाल ईरान में मातम का माहौल है, लेकिन साथ ही बदले की आग भी सुलग रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से होता है या फिर यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाता है।
मध्य पूर्व की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है—और दुनिया की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं।










