
Swami Avimukteshwarananda should prove that he is Shankaracharya. प्रयागराज माघ मेले में पालकी रथ यात्रा रोके जाने के विरोध में पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर स्वयं को शंकराचार्य बता रहे हैं। मेला प्राधिकरण का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी व्यक्ति का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं हुआ है, ऐसे में शिविर के बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य लिखना आदेश की अवहेलना है।
साधु-संतों से मिलने निकले शंकराचार्य
मंगलवार सुबह शंकराचार्य साधु-संतों से मिलने के लिए निकले। समर्थकों के मुताबिक यह अभियान गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने से जुड़ा है। उन्होंने दोपहर 2 बजे तक लौटने की बात कही है, लेकिन शिविर में प्रवेश तभी करेंगे जब उन्हें ससम्मान स्नान कराया जाएगा।
साधु-संतों की नाराजगी, बोले- “शंकराचार्य के ऊपर कोई नहीं”
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी रमण पुरी ने कहा— “पूरे मेले का सिस्टम सिर्फ एक बाबा के लिए बना दिया गया है, जबकि शंकराचार्य का स्तर गिरा दिया गया।”वहीं पीठाधीश्वर साध्वी श्री गौरी ने कहा— “शंकराचार्य के ऊपर कोई नहीं होता। हमारे लिए वे गुरु और भगवान समान हैं।”
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि “इतिहास में जब भी शंकराचार्य स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। मेरे साथ यह परंपरा तोड़ी गई।” उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रहेंगे।
अखिलेश यादव ने फोन पर जताया समर्थन
सोमवार देर रात सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा— “मैं आपके साथ हूं, जल्द ही मिलने आऊंगा।” इस बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि गंगा-यमुना में स्नान करना हर हिंदू का जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन उनसे यह अधिकार भी छीन लिया गया।
हर्षा रिछारिया ने किया समर्थन, बोलीं- “ये बेटी आपके साथ है”
महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने वीडियो जारी कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा— “जो कुछ हुआ, वह दहला देने वाला है। शंकराचार्य की ये बेटी उनके साथ है। हमारी संस्कृति में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान रखते हैं।”
सामने आया मौनी अमावस्या का बवाल
मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य की रथ यात्रा के दौरान हुए विवाद का CCTV फुटेज सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाई थी, जिसे शंकराचार्य के समर्थकों ने तोड़ दिया। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। अफरा-तफरी बढ़ने पर पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन समर्थक रथ को आगे ले जाते रहे।
शंकराचार्य का आरोप- “भीड़ में हमें भी मारा जा सकता था”
शंकराचार्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा— “बार-बार मुझे पालकी से उतारने की कोशिश की गई। अगर उस भीड़ में मुझे कुछ हो जाता, तो सारा दोष मेरे ऊपर मढ़ दिया जाता।” उन्होंने कहा कि अगर किसी शिष्य ने अनुशासन तोड़ा, तो प्रशासन को उनसे बात करनी चाहिए थी, न कि लाठीचार्ज और हिरासत का रास्ता अपनाना चाहिए था।








