शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बनाम प्रशासन : 48 घंटे में दूसरा नोटिस, बैन की चेतावनी

Shankaracharya Avimukteshwarananda warned of ban on Magh Mela
Shankaracharya Avimukteshwarananda warned of ban on Magh Mela

Shankaracharya Avimukteshwarananda warned of ban on Magh Mela प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर दूसरा नोटिस जारी करते हुए सवाल किया है कि क्यों न अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए। यह नोटिस मौनी अमावस्या के दिन हुई घटनाओं को लेकर भेजा गया है।

मौनी अमावस्या पर बैरियर तोड़ने और पालकी ले जाने का आरोप

मेला प्रशासन का आरोप है कि मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने इमरजेंसी के लिए आरक्षित पांटून पुल पर लगा बैरियर तोड़ दिया। बिना अनुमति के बग्घी और पालकी के साथ संगम जाने की कोशिश की गई, जबकि उस समय वहां भारी भीड़ मौजूद थी। प्रशासन का कहना है कि इससे भगदड़ का खतरा पैदा हुआ और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

सुरक्षा व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप, 24 घंटे में जवाब की मांग

नोटिस में कहा गया है कि इस घटना के चलते श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने में परेशानी हुई और मेला क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो अविमुक्तेश्वरानंद की संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं। साथ ही भविष्य में मेला क्षेत्र में प्रवेश पर भी रोक लगाई जा सकती है।

खुद को शंकराचार्य बताने पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

दूसरे नोटिस में यह सवाल भी उठाया गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद मेले में खुद को शंकराचार्य बताकर बोर्ड क्यों लगा रहे हैं, जबकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है। प्रशासन का कहना है कि यह अदालत के आदेशों का उल्लंघन हो सकता है।

प्रशासन पर बदले की भावना से कार्रवाई का आरोप

अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने प्रशासन पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नोटिस को बैक डेट में जारी कर शिविर पंडाल के पीछे चुपचाप चस्पा किया गया। उनका दावा है कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही मेला प्रशासन को सौंपा जाएगा।

पहले नोटिस पर 8 पन्नों का जवाब और मानहानि की चेतावनी

इससे पहले मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पहला नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए नोटिस को मनमाना और असंवैधानिक बताया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो मानहानि का मुकदमा किया जाएगा।

शिष्यों से मारपीट का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा

माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित मारपीट का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

राजनीतिक समर्थन और संत समाज की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस विवाद को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेता अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आए हैं, जबकि कुछ संतों ने प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराया है। संत समाज में भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिल रहे हैं।

माघ मेले से जुड़ा विवाद बना बड़ा मुद्दा

प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा यह शंकराचार्य विवाद अब धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें प्रशासन को दिए जाने वाले जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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