
RSS is not a paramilitary organisation-Bhagwat, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ को लेकर फैली गलत धारणाओं पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ भले ही वर्दी पहनता हो, अनुशासन के साथ मार्च करता हो और शारीरिक अभ्यास कराता हो, लेकिन उसे अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) संगठन समझना पूरी तरह गलत है। भागवत ने कहा कि संघ एक अनूठा सामाजिक संगठन है, जिसे किसी एक परिभाषा या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता।
RSS का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना
मोहन भागवत ने कहा कि RSS का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना और उसमें अच्छे संस्कार, गुण और सद्गुण विकसित करना है, ताकि भारत फिर कभी किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए। उन्होंने कहा कि संघ किसी से लड़ने या प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं बना है, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर, संगठित और चरित्रवान बनाने के लिए काम करता है। संघ का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण करना है।
RSS को बीजेपी के नजरिए से देखना सबसे बड़ी गलती
भागवत ने इस बात पर खास जोर दिया कि संघ को बीजेपी के नजरिए से समझने की कोशिश करना एक बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भाजपा, विद्या भारती या संघ से जुड़े किसी अन्य संगठन को देखकर RSS को समझने की कोशिश करता है, तो वह संघ के वास्तविक स्वरूप को कभी नहीं समझ पाएगा। संघ एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जबकि भाजपा एक राजनीतिक दल है—दोनों की भूमिका और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं।
RSS के खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में RSS के खिलाफ एक झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। लोग बिना गहराई में जाए, बिना विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लिए, संघ के बारे में राय बना लेते हैं। कई लोग विकिपीडिया या सोशल मीडिया पर उपलब्ध अधूरी या गलत जानकारियों के आधार पर संघ को आंकते हैं, जबकि सच्चाई इससे कहीं अलग है।
संघ की वास्तविक भूमिका जनता तक पहुंचाना जरूरी
मोहन भागवत ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वह देशभर का दौरा कर रहे हैं, ताकि संघ की वास्तविक भूमिका और उद्देश्य को आम जनता तक सीधे पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि संघ का जन्म किसी के विरोध या प्रतिक्रिया में हुआ था। RSS न तो किसी विचारधारा के खिलाफ बना और न ही किसी संगठन से मुकाबले के लिए। इतिहास का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत पर आक्रमण करने वाले केवल अंग्रेज ही नहीं थे। उनसे पहले भी कई बार बाहर से आए सीमित संख्या के लोग भारत को पराजित करने में सफल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आक्रमणकारी न तो हमसे अधिक संपन्न थे और न ही अधिक योग्य, फिर भी वे सफल कैसे हुए? इसका कारण समाज की आंतरिक कमजोरी और बिखराव था।
सद्गुणों के साथ एकजुट समाज ही बदल सकता है देश का भविष्य
उन्होंने कहा कि यदि समाज स्वार्थ से ऊपर उठकर, सद्गुणों और अनुशासन के साथ एकजुट हो जाए, तो देश का भविष्य बदला जा सकता है। संघ इसी दिशा में निरंतर काम कर रहा है। RSS व्यक्ति के चरित्र निर्माण को ही राष्ट्रीय मजबूती की नींव मानता है।
RSS आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर
मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि RSS की आर्थिक स्थिति मजबूत है और वह किसी बाहरी धन, विदेशी सहायता या दान पर निर्भर नहीं है। संघ अपने स्वयंसेवकों के सहयोग और योगदान से ही संचालित होता है, जिससे उसकी स्वायत्तता और पारदर्शिता बनी रहती है।
राजनीति से परे राष्ट्र निर्माण का विचार है RSS
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह बयान उन सभी धारणाओं को चुनौती देता है, जिनमें RSS को राजनीतिक या अर्धसैनिक संगठन के रूप में देखा जाता है। उन्होंने साफ किया कि संघ का मूल उद्देश्य राष्ट्र, समाज और व्यक्ति का नैतिक, सांस्कृतिक और चारित्रिक उत्थान है, न कि सत्ता, राजनीति या टकराव।









