
77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ एक बार फिर भारत की संप्रभुता, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भर संकल्प का सजीव प्रतीक बन गया। 26 जनवरी 2026 का यह ऐतिहासिक दिन केवल एक परेड नहीं, बल्कि नए भारत की आत्मा, आत्मविश्वास और वैश्विक भूमिका का ऐलान था। इस वर्ष का गणतंत्र दिवस विशेष रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित रहा, जिसकी झलक पूरे समारोह में स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
तिरंगे की शान और संविधान की गरिमा
सुबह जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर्तव्य पथ पहुंचीं, पूरा वातावरण राष्ट्रगौरव से भर उठा। राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराया, और उसके साथ ही भारतीय सेना ने 21 तोपों की सलामी दी। यह सलामी न केवल भारत की सैन्य परंपरा का प्रतीक थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि भारत आज भी उतना ही सशक्त, सक्षम और सजग है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि रहीं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष सैंटोस डा कोस्टा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है।
सैन्य परेड: अनुशासन, शौर्य और बलिदान की मिसाल
सैन्य परेड की शुरुआत सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा पुष्प वर्षा से हुई। इसके बाद कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित रेजीमेंट्स ने कदमताल की।
राजपूत रेजीमेंट, असम रेजीमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, सिख लाइट इन्फैंट्री, अरुणाचल स्काउट्स और आर्मी की कैवेलरी टुकड़ी ने अनुशासन और शौर्य का अद्भुत प्रदर्शन किया।
सीमा सुरक्षा बल, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और दिल्ली पुलिस के दस्तों ने भी मार्च कर देश की आंतरिक सुरक्षा की मजबूत तस्वीर पेश की। विशेष आकर्षण रहा रेगिस्तान के जहाज ऊंटों पर सवार बीएसएफ का दस्ता, जो 1976 से लगातार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा रहा है।
‘हिम योद्धा’: मूक योद्धाओं को नमन
इस वर्ष परेड की सबसे भावनात्मक झलक रही ‘हिम योद्धा’ थीम। भारतीय सेना ने उन मूक साथियों को मंच दिया, जो सियाचिन, गलवान और लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सेवा करते हैं। डबल कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर पोनी, प्रशिक्षित के-9 डॉग्स, ब्लैक काइट्स और ग्लेशियर क्षेत्रों में चलने वाले विशेष ATV वाहन दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने। इन मूक योद्धाओं ने साबित किया कि भारत की रक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि समर्पण और सहयोग से भी मजबूत होती है।
मिसाइलें और आत्मनिर्भर भारत
कर्तव्य पथ पर जब आकाश, ब्रह्मोस, अग्निबाण और सूर्यास्त्र मिसाइल टुकड़ियां आगे बढ़ीं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यह प्रदर्शन भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सशक्त संदेश था। तीनों सेनाओं के आधुनिक और स्वदेशी हथियारों ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है।
आसमान से ताकत का संदेश
परेड के बाद भारतीय वायुसेना ने कर्तव्य पथ के ऊपर से फ्लाई-पास्ट किया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29, सी-295, अपाचे, एलसीएच, एएलएच और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की गगनभेदी गर्जना ने यह साफ कर दिया कि भारत की सुरक्षा हवा, जमीन और समुद्र—तीनों मोर्चों पर अडिग है।
झांकियों में संस्कृति और विकास की कहानी
सैन्य शक्ति के बाद झांकियों के माध्यम से भारत की संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा सामने आई।
पंजाब की झांकी में गुरु तेग बहादुर का बलिदान, मध्य प्रदेश में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, ओडिशा में महिला सशक्तिकरण और सेमीकंडक्टर प्रगति, मणिपुर में जैविक खेती, राजस्थान में हस्तशिल्प, जम्मू-कश्मीर में केसर और कृषि विकास को जीवंत रूप में दर्शाया गया।
केंद्र सरकार के मंत्रालयों की झांकियों में डिजिटल इंडिया, भारतीय न्याय संहिता, सूचना क्रांति, स्मार्ट पावर और पीएम श्री स्कूल जैसी पहलों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
डेयर डेविल्स और युवा भारत
सेना की डेयर डेविल टीम ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
एनसीसी गर्ल्स, एनसीसी बॉयज़ और माय भारत नेशनल सर्विस के युवाओं ने जोशीले मार्च से यह साबित किया कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
वंदे मातरम् और समापन
वंदे मातरम् के 150 वर्षों पर आधारित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे देश की आत्मा को छू लिया। राष्ट्रगान के साथ कर्तव्य पथ परेड का भव्य समापन हुआ।
राष्ट्रपति और विदेशी मेहमानों के रवाना होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शक दीर्घा के पास पहुंचे और दोनों ओर जाकर जनता का अभिवादन किया—यह दृश्य लोकतंत्र और जनसंपर्क की जीवंत तस्वीर बन गया।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा,
“एक सफल भारत पूरी दुनिया को अधिक स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध बनाएगा।”
77वें गणतंत्र दिवस ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है।









