
पाक और बरकतों से भरे रमजान के महीने में देश के अलग-अलग राज्यों से आपसी सम्मान और भाईचारे की मिसाल देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने रोजा रखने वाले मुस्लिम कर्मचारियों को राहत देते हुए मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने रमजान के दौरान सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों को रोजाना तय समय से एक घंटा पहले घर जाने की अनुमति दी है, ताकि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों को आसानी से निभा सकें। छत्तीसगढ़ से पहले तेलंगाना सरकार ने रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक घंटा पहले ऑफिस छोड़ने की अनुमति देने संबंधी आदेश जारी किया था. इसी तरह का आदेश आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से भी जारी किया गया है, जिसमें मुस्लिम कर्मचारी शाम 4 बजे ऑफिस छोड़ सकेंगे।
इसके अलावा तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने भी राज्य में दुकानों और बिजनेस की जगहों को सुबह 5 बजे तक खुला रखने की इजाज़त दी है । दुकानों और होटलों को हर दिन सहरी (सुबह का खाना) या सुबह 5 बजे तक काम करने की इजाजत दी गई है
धार्मिक आस्था के सम्मान का कदम
भारतीय जनता पार्टी शासित छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में लागू होगी। यह विशेष सुविधा रमजान खत्म होने तक जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला रोजा रखने वाले कर्मचारियों की सुविधा और उनकी धार्मिक आस्था के सम्मान के लिए लिया गया है, जिससे वे इबादत और जरूरी धार्मिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय निकाल सकें।
फैसले का हुआ स्वागत
इस फैसले का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सलीम राज ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं के नेतृत्व में राज्य में सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के विजन का उदाहरण बताया।
दूसरे राज्यों में भी मिल रही राहत
छत्तीसगढ़ से पहले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सरकारें भी मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान के दौरान एक घंटा पहले कार्यालय छोड़ने की अनुमति दे चुकी हैं। आंध्र प्रदेश में कर्मचारी शाम 4 बजे तक ऑफिस से जा सकते हैं। तेलंगाना सरकार ने मानवीय पहल दिखाते हुए दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सुबह 5 बजे तक खुले रखने की भी अनुमति दी है, ताकि रोजा रखने वाले लोग सेहरी और अन्य जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें।
रमजान: इबादत, संयम और भाईचारे का संदेश
रमजान का पवित्र महीना चांद दिखने के बाद शुरू हो चुका है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और रात में मस्जिदों में विशेष तरावीह की नमाज अदा करते हैं। यह महीना सिर्फ इबादत का ही नहीं, बल्कि मानवता, सहिष्णुता और आपसी सम्मान का भी संदेश देता है। इस तरह राज्यों द्वारा उठाए गए ये कदम समाज में सौहार्द, संवेदनशीलता और धार्मिक सहअस्तित्व की मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं।








