
मंगलवार को भोपाल में आयोजित किसान सम्मेलन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील देश और किसानों के हितों के खिलाफ है और इसे दबाव में साइन किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री पर दो तरह के दबाव हैं—एक अमेरिका में कथित एपस्टीन फाइल्स का और दूसरा उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े मामलों का। उन्होंने दावा किया कि इसी दबाव में मोदी सरकार ने भारत का डेटा और किसानों के हित अमेरिका के हवाले कर दिए। राहुल ने कहा कि 21वीं सदी में डेटा सबसे बड़ी ताकत है और जिसके पास डेटा है वही भविष्य जीतेगा। उनके अनुसार इस समझौते की छोटी सी शर्तों में भारत का रणनीतिक डेटा अमेरिका को देने की बात शामिल है, जो देश की संप्रभुता के लिए खतरा है।
चार महीने तक यह डील कृषि मुद्दों पर अटकी रही
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चार महीने तक यह डील कृषि मुद्दों पर अटकी रही क्योंकि सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिका की बड़ी कृषि कंपनियां—सोया, कपास और मक्का—भारतीय बाजार में खुले तौर पर प्रवेश करें। उन्होंने कहा कि लोकसभा में जब वे पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब का हवाला देकर चीन घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरना चाहते थे, तब उन्हें बोलने नहीं दिया गया। राहुल ने दावा किया कि यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने से रोका गया। उनके मुताबिक, उन्होंने जैसे ही भाषण में गंभीर मुद्दे उठाने शुरू किए, उन्हें बार-बार टोका गया और अंततः बोलने का अवसर ही नहीं दिया गया।
राहुल की प्रधानमंत्री को खुली चुनौती
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनके भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर डील के लिए सहमति जता दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला कैबिनेट की व्यापक चर्चा के बिना लिया गया। राहुल के अनुसार, इस डील के तहत भारत को हर साल भारी मात्रा में अमेरिकी सामान खरीदने की बाध्यता होगी, जिससे देश की टेक्सटाइल और कृषि इंडस्ट्री पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब अन्य देशों ने अमेरिकी टैरिफ पर सख्त रुख अपनाया, तब भारत की ओर से कोई कड़ा बयान नहीं आया। राहुल ने प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर दम है तो इस डील को रद्द करके दिखाएं।
मोदी सरकार ने किसानों को कमजोर किया
सभा के दौरान राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों को कमजोर किया, टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान पहुंचाया और अब बांग्लादेश की मदद के नाम पर जीरो टैक्स की बात कर रही है, जबकि भारतीय उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह समझौता देशहित में नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक छवि और भविष्य को बचाने के लिए किया गया है। राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे डरें नहीं, क्योंकि सच उनके साथ है। इस बीच कार्यक्रम स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। ट्रैफिक डायवर्जन के बावजूद कई कार्यकर्ता अलग-अलग मार्गों पर डटे रहे और कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध के दौरान लगी चोटें भी राहुल गांधी को दिखाईं।
नरेंद्र मोदी “सरेंडर मोदी”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी “सरेंडर मोदी” हैं और उन्होंने देश तथा किसानों के साथ छल किया है। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आंख में आंख मिलाकर बात नहीं कर पाते और प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता रोज “चाय पर चर्चा” की बात करते थे, क्या वे देश को बेचने की चर्चा करते थे? खड़गे ने मोदी को “डरपोक प्रधानमंत्री” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस को डराने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और पार्टी किसानों व देशहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।









