
विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने लोकसभा में आज चुनाव सुधार (Election Reforms) पर हुई गर्मागर्म चर्चा के दौरान एक बार फिर EVM प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय लोकतंत्र को नियंत्रित और कमजोर करने की एक “संगठित कोशिश” चल रही है, जिसमें चुनाव आयोग पर दबाव और चुनावी पारदर्शिता को कम करने जैसे कदम शामिल हैं।
Rahul Gandhi ने EVM पर किए सवाल और मांगें जवाब
राहुल गांधी ने कहा कि यदि चुनाव वास्तव में निष्पक्ष हैं, तो चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि: चुनाव से पहले पार्टियों को मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाली वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई जाए। राजनीतिक दलों को EVM देखने और उसकी कार्यप्रणाली समझने की अनुमति दी जाए। EVM सिस्टम के बैकएंड, चिप और ट्रांसमिशन सिस्टम की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था हो।
वोट चोरी, लोकतंत्र के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध
Rahul Gandhi ने कहा, “हमें EVM दिखाइए, हमें एक्सेस दीजिए। अगर सब ठीक है तो छुपाने की क्या जरूरत है?” उन्होंने यह भी कहा कि वोट चोरी, लोकतंत्र के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है और यह किसी भी अन्य एंटी-नेशनल गतिविधि से ज्यादा खतरनाक है।
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर भारत के लोकतंत्र को चोट पहुँचा रही है।
उन्होंने कहा, “वोट चोरी से बड़ा एंटी-नेशनल काम कुछ नहीं। बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत भारत के विचार को नष्ट कर रही है।”
सीसीटीवी फुटेज 45 दिन बाद डिलीट करने पर Rahul Gandhi के सवाल
राहुल गांधी ने यह गंभीर सवाल उठाया कि चुनावों से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सिर्फ 45 दिनों में डिलीट करने का अधिकार क्यों दिया गया? उन्होंने कहा कि यह पारदर्शिता खत्म करने और संभावित छेड़छाड़ को छिपाने की कोशिश है।
साल 2023 में पास हुए कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि: चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी कार्रवाई के लिए जवाबदेही से छूट दे दी गई, और चुनाव से जुड़े फुटेज को जल्दी नष्ट करने की इजाजत भी दे दी गई। उन्होंने कहा, “इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया। यह फैसला लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है।”
चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को क्यों हटाया गया?
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव कर चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को क्यों हटाया? उन्होंने पूछा: प्रधानमंत्री और गृहमंत्री इस बात को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं कि चुनाव आयुक्त कौन होगा?
क्या यह चुनाव आयोग को नियंत्रित करने का प्रयास है?
Rahul Gandhi ने कहा कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई है, जबकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए उसका स्वतंत्र होना जरूरी है।
लोकसभा की इस चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ये अतिरिक्त मुद्दे भी उठाए, जो आज विभिन्न मीडिया स्रोतों में प्रकाशित हुए:
VVPAT मिलान को लेकर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि: देश में सिर्फ 5 EVM के VVPAT का मिलान करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पूरा VVPAT–EVM मिलान करने की मांग दोहराई, जिसका समर्थन कई विपक्षी दल पहले भी करते रहे हैं।
Rahul Gandhi ने कहा— दुनिया के कई बड़े लोकतंत्र EVM का उपयोग नहीं करते उन्होंने अमेरिकी, यूरोपीय और जापानी चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा: “पूरी दुनिया बैलेट पेपर पर जा रही है, लेकिन भारत में सवाल पूछने पर ही आपत्ति हो जाती है।”
मतगणना प्रक्रिया पर सवाल
उन्होंने कहा कि मतगणना केंद्रों पर:
इंटरनेट/ब्लूटूथ जैमर का उपयोग
डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया
और EVM स्टोर रूम की सुरक्षा
सब पर पारदर्शिता की जरूरत है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर टिप्पणी
राहुल ने कहा कि आज चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष “रेफरी” की नहीं दिखती, बल्कि वह “सरकार के इशारों पर चलने वाली संस्था” बन गया है। उन्होंने कहा कि आयोग को विपक्ष से सवाल पूछने से डरना नहीं चाहिए।









