
Patna High Court to get 9 judges, decision taken in collegium meeting, बिहार की न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Supreme Court of India के कॉलेजियम ने Patna High Court में 9 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की है। गुरुवार को हुई कॉलेजियम की बैठक में इन नामों पर विचार कर प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की औपचारिक स्वीकृति के बाद होगा।
किन-किन नामों की हुई सिफारिश?
कॉलेजियम की बैठक में जिन अधिवक्ताओं के नामों पर मंथन हुआ, उनमें शामिल हैं: मो. नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकाश कुमार। इन सभी नामों को अब केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र की मंजूरी और राष्ट्रपति की अधिसूचना के बाद ही ये अधिवक्ता पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाल पाएंगे।
मौजूदा स्थिति: 53 स्वीकृत पद, सिर्फ 38 जज कार्यरत
फिलहाल पटना हाईकोर्ट में 53 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 38 जज कार्यरत हैं। यानी करीब 15 पद पहले से ही खाली हैं। इस वर्ष तीन न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिनमें मुख्य न्यायाधीश S. K. Sahoo भी शामिल हैं। ऐसे में 9 नए जजों की नियुक्ति के बाद भी अदालत में पदों की कमी पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
जजों की कमी से प्रभावित हो रही सुनवाई
पटना हाईकोर्ट लंबे समय से जजों की कमी से जूझ रहा है। स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग आधी संख्या में ही न्यायाधीश काम कर रहे हैं। इसका सीधा असर मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है। लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और कई मामलों में सुनवाई में देरी हो रही है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए जजों की नियुक्ति से कामकाज में तेजी आएगी और पेंडेंसी कम करने में मदद मिलेगी।
नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम पहले नामों की सिफारिश करता है। इसके बाद ये नाम केंद्र सरकार को भेजे जाते हैं।
केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद फाइल राष्ट्रपति के पास जाती है। राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति की अधिसूचना जारी होते ही प्रक्रिया पूरी मानी जाती है और संबंधित व्यक्ति शपथ लेकर पद संभालता है।
क्या बदलेगी तस्वीर ?
पटना हाईकोर्ट में 9 नए जजों की नियुक्ति निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, स्वीकृत पदों की तुलना में अभी भी पर्याप्त संख्या में पद खाली रहेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में और नियुक्तियां होती हैं, तो न्यायिक प्रक्रिया में गति आएगी, मामलों का निपटारा तेज होगा और आम जनता को समय पर न्याय मिल सकेगा। बिहार की न्याय व्यवस्था के लिए यह एक महत्वपूर्ण दौर है, जहां नई नियुक्तियों से उम्मीद की जा रही है कि अदालत की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।










