अब अस्पताल नहीं, इलाज पहुंचेगा घर तक : मोबाइल स्ट्रोक यूनिट से पूर्वोत्तर में बदलेगी स्ट्रोक मरीजों की किस्मत

No more hospitals, treatment will reach your home
No more hospitals, treatment will reach your home


No more hospitals, treatment will reach your home, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। इसी दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल करते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (Mobile Stroke Unit – MSU) सौंपी हैं। इस कदम से असम के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब उनके घर तक त्वरित और जीवन रक्षक स्ट्रोक उपचार मिल सकेगा।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि भारत अब ग्रामीण क्षेत्रों में इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ मोबाइल स्ट्रोक यूनिट के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व का दूसरा देश बन गया है। यह उपलब्धि भारत के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

स्ट्रोक में हर मिनट है बेहद कीमती

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट करीब 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मृत्यु या आजीवन विकलांगता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, भारत के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती मरीज को समय पर स्ट्रोक-सक्षम अस्पताल तक पहुंचाना रही है।

अब अस्पताल पहुंचेगा मरीज के घर

इसी समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सौंपी हैं। यह यूनिट एक चलता-फिरता अस्पताल है, जिसमें सीटी स्कैन मशीन, प्वाइंट-ऑफ-केयर लैब, ब्लड क्लॉट तोड़ने वाली दवाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों से टेलीकंसल्टेशन की सुविधा मौजूद है। इससे मरीज के घर या आसपास ही स्ट्रोक की पहचान और तुरंत इलाज संभव हो सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत सबसे वंचित, गरीब और दूरस्थ क्षेत्रों तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

पूर्वोत्तर भारत में स्ट्रोक उपचार में आई क्रांति

पूर्वोत्तर भारत में स्ट्रोक की दर देश के कई अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण समय पर इलाज हमेशा चुनौती रहा है। इसे देखते हुए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज, तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल और बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की हैं, जिन्हें अब मोबाइल स्ट्रोक यूनिट से जोड़ा गया है।

उपचार समय 24 घंटे से घटकर 2 घंटे

इस मॉडल के परिणाम बेहद प्रभावशाली रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार:

  • उपचार का औसत समय 24 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे हो गया
  • स्ट्रोक से होने वाली मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई
  • मरीजों में विकलांगता आठ गुना तक कम हुई

2021 से अगस्त 2024 के बीच मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। इनमें से 294 संदिग्ध स्ट्रोक मामलों की जांच की गई और करीब 90 प्रतिशत मरीजों का इलाज उनके घर पर ही किया गया।

108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ने से बढ़ी पहुंच

मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से जोड़ने के बाद इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई है, जिससे दूर-दराज़ के गांवों तक भी यह सेवा आसानी से पहुंच पा रही है।

असम सरकार ने जताया भरोसा

असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव एवं आयुक्त पी. अशोक बाबू ने कहा कि इस हस्तांतरण से राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रणाली और मजबूत होगी। उन्होंने आईसीएमआर के सहयोग को राज्य के लिए बेहद उपयोगी बताया और इसे भविष्य में विस्तार के लिए मजबूत आधार करार दिया।

यह पहल न केवल असम बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई दिशा साबित हो रही है, जो समय पर इलाज देकर हजारों जिंदगियां बचाने में मददगार होगी।

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