
NGT, Sariska Tiger Reserve, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को लेकर जो अहम् फैसला लिया है वह स्वागत के योग्य है। मंगलवार को जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि अब पर्यावरण से जुड़े तीन अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक मुद्दे हैं, उन पर भी माननीय सुप्रीम कोर्ट को अरावली मामले की तरह ही स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करे ।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व फैसला
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया हैडल X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और भारत सरकार के सरिस्का टाइगर रिज़र्व की सीमाओं को दोबारा तय करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी-इसके तहत लगभग 57 बंद खदानों को खोलने का रास्ता बनाया जा रहा था। इस प्रस्ताव को साफ तौर से खारिज कर देना चाहिए।
पर्यावरणीय मंज़ूरियों पर रोक का मामला
दूसरा 18 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही 16 मई 2025 के उस फैसले की समीक्षा का दरवाज़ा खोल दिया था, जिसमें पूर्व प्रभाव से दी जाने वाली पर्यावरणीय मंज़ूरियाँ (retrospective environmental approvals) पर रोक लगाई गई थी। ऐसी मंज़ूरियाँ न्यायशास्त्र की बुनियाद के विरुद्ध हैं और शासन व्यवस्था का उपहास बनाती हैं। इस फैसले की समीक्षा अनावश्यक थी। पूर्व प्रभाव से मंज़ूरी कभी भी नहीं दी जानी चाहिए। क़ानूनों, नियमों और प्रावधानों को अक्सर जानबूझकर इस भरोसे के साथ दरकिनार किया जाता है कि परियोजना शुरू हो जाने के बाद निर्णय प्रक्रिया को “मैनेज” कर लिया जाएगा।
तीसरा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का मामला
तीसरा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्थापना अक्टूबर 2010 में संसद द्वारा पारित एक अधिनियम के तहत, सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत परामर्श और उसके पूर्ण समर्थन के साथ की गई थी। पिछले एक दशक में इसकी शक्तियों को पूरी तरह से कमज़ोर कर दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप आवश्यक है, ताकि NGT बिना किसी भय या पक्षपात के, कानून के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
बता दें कि कल सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा में बदलाव को लेकर 20 नवंबर 2025 को दिए गए अपने ही फैसले को स्वतः संज्ञान लेते हुए वापस ले लिया। जबकि मोदी सरकार ने उस फैसले को पूरे उत्साह के साथ अपनाया था। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अत्यंत आवश्यक और स्वागत योग्य था।









