
Middle East tensions fuel oil prices, with crude oil crossing $90, Middle East में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। हालात ऐसे हैं कि ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों ही कच्चे तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं, जो लगभग ढाई साल का उच्च स्तर है। तेल बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट संकट के बीच सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। तनाव के कारण यहां से तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।
तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों और बाजार को भी चिंतित कर दिया है।
ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में बड़ी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई
- अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया
- दोनों ही कच्चे तेल करीब 30 महीने के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च महीने में ही कच्चे तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा हो चुका है।
साल 2023 के बाद पहली बार इतना महंगा तेल
तेल बाजार के आंकड़े बताते हैं कि:
- ब्रेंट क्रूड अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार 94 डॉलर के स्तर पर पहुंचा
- अमेरिकी कच्चा तेल सितंबर 2023 के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया
- मौजूदा साल में ब्रेंट क्रूड करीब 33 प्रतिशत महंगा हो चुका है
- वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत में 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है
यह तेजी तेल बाजार में सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से देखी जा रही है।
भारत के वायदा बाजार में भी रिकॉर्ड स्तर
वैश्विक बाजार में तेजी का असर भारत के घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। कारोबार के दौरान कच्चा तेल 8,518 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव जारी रहता है तो घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 10,000 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है तो देश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि भारत इस असर को कम करने के लिए रूस से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यदि सस्ता रूसी तेल मिलता रहा तो आम लोगों पर इसका असर कुछ हद तक कम हो सकता है।









