
शनिवार सुबह मिडिल ईस्ट में हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर दिए। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक इन हमलों में दक्षिणी ईरान में 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 लोग घायल बताए जा रहे हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार मिनाब शहर में 24 छात्राओं की मौत की पुष्टि की गई है, वहीं कुछ हमलों में 5 छात्राओं के मारे जाने की भी खबर है। हमलों के बाद तेहरान के आसमान में धुएं का गुबार देखा गया और कई रिहायशी इलाकों के पास धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
‘लायन्स रोर’ ऑपरेशन: खामेनेई का ऑफिस निशाने पर
इजराइल ने अपने इस सैन्य अभियान को ‘लायन्स रोर’ यानी ‘शेर की दहाड़’ नाम दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त सैन्य अभियान है। इजराइल ने ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय और ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन को निशाना बनाया। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया। अमेरिकी-इजराइली हमलों में खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई, हालांकि ईरानी मीडिया ने कहा कि राष्ट्रपति और विदेश मंत्री अब्बास अरागची सुरक्षित हैं।
ईरानी कमांडर पर दावा और सैन्य नुकसान
इजराइली दावे के मुताबिक ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर मारे गए हैं। वे 2025 में हुसैन सलामी की मौत के बाद इस पद पर आए थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान का पलटवार : 400 मिसाइलों से जवाब
हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागीं। इजराइली सेना ने पुष्टि की कि मिसाइलें उनकी ओर आती देखी गईं, जिसके बाद कई इलाकों में सायरन बजाए गए और लोगों को बंकरों में शरण लेने के निर्देश दिए गए। इजराइल के कई हिस्सों में मिसाइलों के टुकड़े गिरे, हालांकि तत्काल किसी बड़े हताहत की सूचना नहीं मिली।
अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर
ईरान ने केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि कतर, कुवैत, बहरीन और UAE में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। कतर के अल-उदैद एयर बेस, कुवैत के अल-सलेम एयर बेस, UAE के अल-धाफरा एयर बेस और बहरीन स्थित पांचवें अमेरिकी बेड़े के ठिकाने पर मिसाइल हमलों का दावा किया गया। UAE की राजधानी अबू धाबी और दुबई में भी धमाकों की खबरें आईं। अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसके ऊपर से गुजर रही दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया।
ट्रम्प का ऐलान: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों और सहयोगी देशों को खतरे से बचाना है। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइल क्षमताओं को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। अमेरिका ने अपने अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है। ट्रम्प ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से आत्मसमर्पण की अपील भी की।
परमाणु विवाद से बढ़ा टकराव
यह संघर्ष ऐसे समय में भड़का है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। विवाद का मुख्य मुद्दा ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम है, जिसे ईरान अपनी ‘रेड लाइन’ मानता है। अमेरिका ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध, पहले से संवर्धित यूरेनियम हटाने, लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करने जैसी चार शर्तें रखी थीं, जिन पर ईरान तैयार नहीं हुआ।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
मिडिल ईस्ट में इस समय 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। क्षेत्र में 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं। अमेरिका का न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड भी तैनात है। पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और अन्य युद्धपोत भी क्षेत्र में मौजूद हैं।
उड़ानें रद्द, एयरस्पेस बंद
इस बढ़ते तनाव का असर नागरिक उड्डयन पर भी पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कर दी हैं। इराक और इजराइल ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और बढ़ता खतरा
दुनियाभर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। रूस ने तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
स्पष्ट है कि यह टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहा है। हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह संघर्ष आगे किस दिशा में बढ़ता है।










