केदारनाथ हेमकुंड यात्रा होगी आसान , उत्तराखंड में बनेंगे 50 रोपवे

Kedarnath-Hemkund Yatra will be easier
Kedarnath-Hemkund Yatra will be easier

Kedarnath-Hemkund Yatra will be easier, उत्तराखंड सरकार राज्य में तीर्थ यात्रा और पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सरकार ने प्रदेशभर में 50 रोपवे परियोजनाओं पर काम करने की योजना बनाई है, जिनमें से 6 प्रमुख रोपवे परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। इन परियोजनाओं से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा।

इनमें सबसे अहम सोनप्रयाग से केदारनाथ (18 किमी) और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब (12 किमी) रोपवे परियोजना है, जिनके लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन दोनों रोपवे का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इसके बाद केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की कठिन पैदल यात्रा काफी हद तक आसान और सुरक्षित हो जाएगी।

रोपवे विकास स्टीयरिंग कमेटी की उच्चस्तरीय बैठक

मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में हुई रोपवे विकास स्टीयरिंग कमेटी की उच्चस्तरीय बैठक में इन परियोजनाओं को प्राथमिक सूची में शामिल किया गया। बैठक में रोपवे परियोजनाओं की मंजूरी, निर्माण प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर अहम फैसले लिए गए।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य में बनने वाली सभी रोपवे परियोजनाओं को स्टीयरिंग कमेटी से ही मंजूरी लेनी होगी, ताकि एक ही स्थान पर दोहराव न हो। साथ ही नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के तहत गठित स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के सीईओ की नियुक्ति एक सप्ताह के भीतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं। नई समिति की पहली बोर्ड बैठक इसी महीने के अंत तक होने की संभावना है।

काठगोदाम–हनुमानगढ़ी रोपवे को जल्द मंजूरी

अन्य प्रमुख परियोजनाओं में नैनीताल के काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर तक रोपवे अंतिम मंजूरी के चरण में है। वहीं कणकचौरी–कार्तिक स्वामी रोपवे के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। उत्तरकाशी के राथल–बरसूबा–नाला और जोशीमठ–औली–गोरसों रोपवे के लिए डीपीआर टेंडर प्रक्रिया जारी है।

कैंची धाम को भी रोपवे से जोड़ने की तैयारी

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि काठगोदाम–हनुमानगढ़ी रोपवे परियोजना में कैंची धाम को शामिल करने की संभावना का तुरंत अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि कैंची धाम में हर साल बढ़ती भीड़ को देखते हुए अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाना बेहद जरूरी है। सरकार का मानना है कि रोपवे परियोजनाओं से चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। हर साल चारधाम यात्रा में 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं, जबकि घरेलू पर्यटन का आंकड़ा भी लगभग इतना ही है। रोपवे बनने से सड़कों पर दबाव कम होगा, भीड़ घटेगी और दुर्गम धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

Pradeep Dabas

Writer & Blogger

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