
Middle East में बढ़ते तनाव के बीच एक बेहद अहम खबर सामने आई है। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार भारत के दो कार्गो जहाज “पुष्पक” और “परिमल” खतरनाक माने जा रहे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते हुए देखे गए हैं। यह वही समुद्री मार्ग है जिसे फिलहाल दुनिया का सबसे संवेदनशील व्यापारिक रास्ता माना जा रहा है।
गौर करने लायक बात यह है कि हाल ही में ईरान ने इस मार्ग से गुजरने के लिए पहले सिर्फ चीनी कार्गो जहाजों को ही अनुमति दी थी। ऐसे में भारतीय जहाजों का इस रास्ते से गुजरना कई सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि या तो भारत और ईरान के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है या फिर भारतीय जहाजों ने अपने जोखिम पर यह रास्ता चुना है।
भारत-ईरान के बीच बढ़ा कूटनीतिक संपर्क
Strait of Hormuz से भारतीय जहाजों के गुजरने की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से टेलीफोन पर बातचीत की।
इसके अलावा ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह भी हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया। इन घटनाओं को देखते हुए यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर कोई समझ बनी हो सकती है।
IRGC की चेतावनी: अमेरिका का इंतजार
इसी बीच ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज को लेकर एक सख्त बयान दिया है। IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका के उस कदम का इंतजार कर रहा है जिसमें अमेरिकी सेना इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने की बात कर रही है। समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को कोई भी फैसला लेने से पहले 1987 की उस घटना को याद करना चाहिए जब अमेरिकी सुपरटैंकर “ब्रिजटन” में आग लग गई थी।
‘मौत का कुंआ’ बन चुका है Strait of Hormuz का रास्ता
इन चेतावनियों और लगातार हो रहे हमलों के कारण फिलहाल इस समुद्री मार्ग को कई विश्लेषक “मौत का मुंह” तक कह रहे हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय जहाज इतनी सहजता से इस मार्ग से कैसे गुजर रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने शायद भारत को यह भरोसा दिया हो कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा।
क्या भारत-ईरान के बीच हुआ कोई गुप्त समझौता?
भारत और ईरान के बीच बातचीत उस समय तेज हुई जब अमेरिका ने श्रीलंका के पास IRIS डेना नाम के एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया। यह जहाज भारतीय नौसेना के साथ एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था। बताया जाता है कि यह हमला ईरान के तट से करीब 2000 मील दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में बिना किसी पूर्व चेतावनी के किया गया। इस घटना के बाद भारत ने हिंद महासागर में फंसे कुछ जहाजों को मानवीय आधार पर मदद भी दी है।
कोच्चि में ईरानी जहाज को मिली शरण
सरकारी सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई है कि भारत ने एक ईरानी जहाज को कोच्चि बंदरगाह में डॉक करने की अनुमति दी है। इस जहाज को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा था। फिलहाल जहाज के सभी नाविक भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित हैं।
भारत पर उठे सवाल
IRIS डेना पर हमले के बाद भारत सरकार पर सवाल भी उठे कि क्या भारतीय नौसेना उस जहाज को सुरक्षा दे सकती थी। नौसेना के सूत्रों के अनुसार 25 फरवरी को मिलन सैन्य अभ्यास समाप्त हो चुका था और उसके बाद जहाज वापस लौट रहा था।
इसके बाद 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए और 4 मार्च को श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर हमला हुआ। चूंकि यह घटना अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई और ईरान की ओर से सुरक्षा का कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया गया था, इसलिए भारत उस जहाज को एस्कॉर्ट नहीं कर सकता था।
क्या संकेत दे रही हैं ये घटनाएं?
Strait of Hormuz से गुजरते भारतीय जहाज, भारत-ईरान के बीच बढ़ता कूटनीतिक संपर्क और समुद्री सुरक्षा को लेकर बदलती रणनीति—ये सभी घटनाएं संकेत दे रही हैं कि हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ेगा या फिर भारत-ईरान के बीच कोई नई रणनीतिक समझ सामने आएगी।









