
Indian Navy to build new naval base in Haldia West Bengal, भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक बेस स्थापित कर रही है। इसका मकसद बंगाल की खाड़ी में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करना, समुद्री निगरानी बढ़ाना और चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश से जुड़ी बदलती समुद्री गतिविधियों पर पैनी नजर रखना है।
हल्दिया, हुगली नदी के किनारे स्थित है और बंगाल की खाड़ी के सैंडहेड्स डीप-सी क्षेत्र से लगभग 130 किलोमीटर दूर है। यहां पहले से मौजूद हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (1970 के दशक से कार्यरत) बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम है, जिससे नौसेना को तैयार बुनियादी ढांचा मिल रहा है।
तेज़ और छोटे युद्धपोतों की तैनाती
इस नए बेस पर मुख्य रूप से फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट तैनात किए जाएंगे। ये पोत तटीय सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन और त्वरित गश्त के लिए बेहद अहम होंगे। इससे समुद्री निगरानी के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी तेजी आएगी।
चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश समुद्री गतिविधियों पर नजर
हाल के वर्षों में बंगाल की खाड़ी में चीन की नौसैनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। चीन ने बांग्लादेश के चटगांव और पायरा पोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया है और बांग्लादेशी नौसेना को युद्धपोत व पनडुब्बियां भी दी हैं। वहीं पाकिस्तान पहले से ही चीनी नौसैनिक प्लेटफॉर्म, पनडुब्बियों और सर्विलांस सिस्टम के जरिए अपनी समुद्री ताकत बढ़ा रहा है। ऐसे में हल्दिया का यह बेस भारत के लिए पूर्वी समुद्री मोर्चे पर एक अहम निगरानी केंद्र बनेगा।
मलक्का स्ट्रेट और अहम समुद्री मार्ग
हल्दिया की रणनीतिक स्थिति से भारतीय नौसेना बंगाल की खाड़ी से मलक्का स्ट्रेट की ओर जाने वाले समुद्री यातायात पर बेहतर निगरानी रख सकेगी। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक है, जहां चीन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
अंडमान-निकोबार कमांड से बेहतर तालमेल
यह नया बेस अंडमान-निकोबार कमांड के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करेगा और पूर्वी समुद्री सीमा पर भारत की प्रतिक्रिया क्षमता को तेज करेगा। किसी भी आपात स्थिति में यह बेस फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट के लिए अहम भूमिका निभाएगा और INS चिल्का जैसे पूर्वी तट के नौसैनिक ठिकानों को और मजबूती देगा।
सैन्य के साथ मानवीय भूमिका
हल्दिया का यह नौसैनिक बेस केवल सैन्य उद्देश्यों तक सीमित नहीं रहेगा। चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों, मानवीय सहायता और नॉन-कॉम्बैटेंट इवैकुएशन ऑपरेशंस में भी यह बेस महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसकी जरूरत बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अक्सर पड़ती है।
स्थानीय स्तर पर फायदे
इस बेस के बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लॉजिस्टिक्स व मेंटेनेंस से जुड़े कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, हुगली नदी और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, बंगाल की खाड़ी में बदलते चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश समुद्री समीकरण के बीच भारत अपनी समुद्री सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है। हल्दिया में नया नौसैनिक बेस भारत का साफ संदेश है कि बंगाल की खाड़ी में किसी भी बाहरी दबाव का जवाब पूरी तैयारी और मजबूती से दिया जाएगा।









