
राजधानी Delhi के पालम इलाके से बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। साध नगर की गली नंबर-2 स्थित एक चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
सुबह करीब 7 बजे लगी आग
जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 7 बजे अचानक इमारत में आग लग गई। उस समय अधिकांश लोग सो रहे थे, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। इमारत में बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था, जो आग की चपेट में आ चुका था। देखते ही देखते कमरों में जहरीला धुआं भर गया और लोग अंदर ही फंस गए।
जान बचाने के लिए बच्चों को नीचे फेंका
हादसे के दौरान कई दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आए । प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक पिता ने अपनी एक साल की बच्ची और दूसरे छोटे बच्चे को बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया।
नीचे खड़े लोगों ने किसी तरह बच्चों को पकड़ लिया—
- एक बच्ची का हाथ फ्रैक्चर हो गया
- दूसरा बच्चा झुलस गया
- एक अन्य बच्चा गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया
इसके बावजूद, बच्चों की जान बच जाना एक राहत की बात रही।
ग्राउंड फ्लोर पर कॉस्मेटिक शोरूम, ऊपर परिवार
यह इमारत स्थानीय व्यापारी राजेंद्र कश्यप की बताई जा रही है।
- बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर: ब्यूटी पार्लर, चूड़ी और कॉस्मेटिक शोरूम
- ऊपरी मंजिलें: परिवार के 15 सदस्य रहते थे
कॉस्मेटिक सामान में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग तेजी से फैल गई, जिससे पूरी बिल्डिंग कुछ ही मिनटों में आग की लपटों में घिर गई।
रेस्क्यू में देरी से भड़का लोगों में गुस्सा
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दमकल विभाग की गाड़ियां देर से पहुंचीं।
करीब आधे घंटे की देरी से पहुंचे दमकल कर्मियों को भी हाइड्रोलिक मशीन सेट करने में समय लगा। हालांकि, Delhi Fire Service की लगभग 30 गाड़ियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
7 लोगों की मौत, कई घायल
दमकल विभाग और पुलिस के अनुसार:
- 7 लोगों की मौत (जिसमें 3 बच्चे शामिल)
- 10 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
- कई लोग गंभीर रूप से झुलसे
घायलों को इलाज के लिए Indira Gandhi International Airport Hospital और Safdarjung Hospital में भर्ती कराया गया है।
अस्पतालों में चल रहा इलाज
- IGI अस्पताल: एक 40 वर्षीय व्यक्ति और 2 साल की बच्ची का इलाज जारी
- सफदरजंग अस्पताल: 19 वर्षीय युवक, लगभग 25% झुलसा
डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
निष्कर्ष
दिल्ली का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या रिहायशी इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है?
एक ही एग्जिट, ज्वलनशील सामान और फायर सेफ्टी की कमी ने इस इमारत को “डेथ ट्रैप” बना दिया। यह घटना न सिर्फ लापरवाही की कहानी है, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक कड़ा सबक भी है।









