
भारतीय क्रिकेटर Rinku Singh के परिवार पर इस समय गहरा दुख छा गया है। जिस घर में शादी की तैयारियों की रौनक थी, वहां अचानक मातम पसर गया। 27 फरवरी की सुबह रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह ने अंतिम सांस ली। यह खबर सुनते ही परिवार ही नहीं, खेल जगत और प्रशंसक भी भावुक हो उठे बताया जा रहा है कि रिंकू और Priya Saroj की शादी जून में प्रस्तावित थी। घर में रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो चुका था, लेकिन पिता के निधन के बाद शादी की तारीख आगे बढ़ाई जा सकती है।
वेंटिलेटर पर थे भर्ती, नहीं बच सके
रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती थे। उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। पिता की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही रिंकू ने टीम का प्रैक्टिस सेशन छोड़ दिया और तुरंत घर लौट आए। यह वही पिता थे जिन्होंने संघर्ष के दिनों में बेटे का हाथ थामे रखा, उसे गिरने नहीं दिया।
संघर्ष से सफलता तक पिता का था सबसे बड़ा साथ
रिंकू सिंह का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। अलीगढ़ में दो कमरों के छोटे से घर में पले-बढ़े रिंकू ने बचपन आर्थिक तंगी में बिताया। उनके पिता गोविला गैस एजेंसी में घर-घर सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे। कई बार हालात इतने कठिन थे कि परिवार को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जूझना पड़ता था। लेकिन खानचंद सिंह ने कभी बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। जब रिंकू क्रिकेट खेलना चाहते थे, तो उन्होंने हर हाल में उनका साथ दिया। मुश्किल दौर में हौसला बढ़ाया, हार के बाद कंधा थपथपाया और जीत पर सबसे ज्यादा गर्व भी उन्हीं की आंखों में झलकता था। आज जब रिंकू भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं, तब यह सफलता उनके पिता के त्याग और संघर्ष की कहानी भी कहती है।
शादी की तैयारियों के बीच छाया सन्नाटा
रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की सगाई पिछले वर्ष 8 जून को लखनऊ के एक होटल में परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में हुई थी। पहले 18 नवंबर 2025 को शादी की तारीख तय हुई थी, लेकिन IPL और अन्य क्रिकेट व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इस बार जून में शादी की तैयारी चल रही थी। घर में खुशियों का माहौल था। परिजनों ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। लेकिन 27 फरवरी की सुबह आई इस खबर ने सब कुछ बदल दिया। अब शादी की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
बुलंदशहर से अलीगढ़ तक का सफर
रिंकू का परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के गांव दानपुर का रहने वाला है। करीब 25 साल पहले रोजगार की तलाश में खानचंद सिंह अलीगढ़ आकर बस गए थे। बुलंदशहर में आज भी उनका पुश्तैनी मकान है। अलीगढ़ में साधारण जीवन जीते हुए उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का सपना देखा। उसी सपने को सच करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की।
खेल जगत में शोक की लहर
रिंकू सिंह की विस्फोटक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ पारियों ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता की प्रेरणा और विश्वास छिपा था। पिता के निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई है। साथी खिलाड़ी, प्रशंसक और खेल प्रेमी परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।
एक बेटा… एक अधूरा सहारा
हर बेटे के लिए पिता सिर्फ अभिभावक नहीं, बल्कि पहला हीरो होता है। रिंकू सिंह के लिए भी उनके पिता वही हीरो थे, जिन्होंने साइकिल पर सिलेंडर ढोते हुए भी बेटे के सपनों का बोझ कभी भारी नहीं होने दिया। आज जब रिंकू अपने करियर की ऊंचाइयों पर हैं, तब उनके जीवन का सबसे मजबूत स्तंभ साथ छोड़ गया। शादी की शहनाइयों के बीच गूंजने वाली खुशी अब कुछ समय के लिए खामोश हो गई है। यह क्षति केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी का दर्द है जिसने एक स्टार खिलाड़ी को जन्म दिया।










