
Congress leader detained and placed under house arrest: Major police action ahead of Chandigarh march, हरियाणा की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब 25 फरवरी 2026 को प्रस्तावित विधानसभा घेराव से पहले ही पुलिस ने राज्यभर में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर दी। चंडीगढ़ कूच से पहले सुबह 5 बजे से ही पुलिस टीमों ने कई जिलों में कांग्रेस नेताओं के घरों पर दबिश दी, उन्हें हिरासत में लिया और नजरबंद कर दिया। बताया जा रहा है कि हिसार, सिरसा, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत और फरीदाबाद समेत कई जिलों में यह “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” (निवारक कार्रवाई) की गई। पुलिस ने न सिर्फ नेताओं को घरों और थानों में नजरबंद किया, बल्कि उनकी गाड़ियां जब्त कर लीं और ड्राइवरों तक को थाने में बैठा लिया।
विधानसभा घेराव से पहले सख्ती
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा “मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान” के तहत चंडीगढ़ में विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित था। इस कार्यक्रम में हिसार सहित कई जिलों से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल होना था। लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए नेताओं की आवाजाही रोक दी।
हिसार में तीन वरिष्ठ नेता हिरासत में
हिसार में पुलिस ने सुबह करीब 5 बजे कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृज लाल बहबलपुरिया, भूपेंद्र गंगवा और एआईसीसी सदस्य राजेंद्र संदलाना सहित तीन नेताओं को उनके आवास से हिरासत में ले लिया। उन्हें सदर थाने में ले जाया गया। बताया गया कि पुलिस की कई गाड़ियां और दर्जनों पुलिसकर्मी सुबह-सुबह उनके घर पहुंचे और चंडीगढ़ जाने से रोक दिया।
सिरसा में भी कार्रवाई
सिरसा में कांग्रेस नेता राजकुमार शर्मा को भी पुलिस ने चंडीगढ़ जाने से रोक दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखने को मिला।
रणदीप सुरजेवाला का हमला
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री नायब सैनी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि “तानाशाही का आलम यह है कि लगभग सभी जिलों में पुलिस भेजकर कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट कर रखा है।”
“लोकतंत्र की हत्या” का आरोप
कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृज लाल बहबलपुरिया ने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध से भयभीत है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनता की आवाज को दबाने का प्रयास बताया। उनका कहना है कि “पुलिस बल के जरिए हमें रोका जा सकता है, लेकिन हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”










