
Congress is responsible for divided India, भाजपा नेता जे.पी. नड्डा ने कहा कि हमारा देश हमेशा बिना शर्त देशभक्ति की भावना को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को वही सम्मान मिलना चाहिए, जैसा सम्मान हम राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज को देते हैं।
Congress is responsible for divided India : नड्डा
नड्डा संसद सत्र के दौरान कांग्रेस पर जमकर बरसे। आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इतिहास में कई बार समझौतों के फैसले किए। वक्फ से जुड़ी व्यवस्थाएं भी उसी समझौता-राजनीति का हिस्सा थीं। बॉम्बे प्रेसिडेंसी का विभाजन मुस्लिम लीग की मांग पर हुआ, जबकि कई लोग इसके पक्ष में नहीं थे। 1947 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् का विरोध किया और कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया। जिन्ना ने दो अलग देशों की मांग की और कांग्रेस ने अंत में “खंडित आजादी” यानी बँटा हुआ भारत स्वीकार कर लिया।
CWC का फैसला— सिर्फ पहले दो छंद गाए जाएं
नड्डा ने बताया कि 1937 में कलकत्ता में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई थी। इसमें यह प्रस्ताव पास किया गया कि – मुस्लिम समुदाय की आपत्तियों को देखते हुए वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद राष्ट्रीय मौकों पर गाए जाएं।
राष्ट्रगान कैसे तय हुआ?— नड्डा का सवाल
नड्डा बोले कि संविधान सभा (Constituent Assembly) की 24 जनवरी 1950 की आखिरी बैठक में अचानक एक वक्तव्य पढ़कर घोषणा कर दी गई कि जन गण मन भारत का राष्ट्रगान होगा। वंदे मातरम् को भी राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि “जब राष्ट्रीय ध्वज पर इतनी चर्चा हुई, कमेटी बनी और रिपोर्ट आई…
तो फिर राष्ट्रगान पर इतनी जल्दी में फैसला कैसे कर लिया गया? उस पर कितनी देर चर्चा हुई?”
1936–37 में गीत में बदलाव — नेहरू के दौर में
नड्डा ने कहा कि 1936–37 में जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
1937 में सांप्रदायिक दबाव की वजह से वंदे मातरम् के कुछ छंद हटाए गए —
खासतौर पर वे हिस्से जिनमें भारत माता को शक्ति की प्रतीक—मां दुर्गा के रूप में दिखाया गया था।
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