अमेरिका को चीन की खुली चेतावनी, ईरान पर हमला किया तो ‘रेयर मेटल’ से होगा वार

China warns US, against attacking Iran with 'rare metals'
China warns US, against attacking Iran with ‘rare metals’

China warns US, against attacking Iran with ‘rare metals’, अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन खुलकर ईरान के समर्थन में आ गया है। बीजिंग ने वॉशिंगटन को कड़ा संदेश देते हुए संकेत दिया है कि यदि तेहरान पर सैन्य कार्रवाई की गई, तो वह रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर तत्काल रोक लगा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा चीन से ही आयात करता है, और वैश्विक स्तर पर इन खनिजों का सबसे बड़ा भंडार चीन के पास है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच वार्ता प्रस्तावित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि चीन सप्लाई रोक देता है तो कुछ ही दिनों में अमेरिका के रक्षा उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अमेरिका के लिए रेयर अर्थ मेटल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

रेयर अर्थ मेटल्स आधुनिक सैन्य तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, फाइटर जेट इंजन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में इनका व्यापक उपयोग होता है। अमेरिकी सेना की रिपोर्ट के अनुसार, अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-35 Lightning II में भी इन धातुओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। सीआरएस (Congressional Research Service) की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका के रक्षा बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसे उत्पादन पर खर्च होता है, जिसमें रेयर अर्थ तत्व अनिवार्य हैं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर और हाई-टेक चिप निर्माण में भी इनकी अहम भूमिका है। अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका अपनी कुल जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन से प्राप्त करता है। ऐसे में निर्यात रोकने की धमकी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान को हथियार आपूर्ति की तैयारी

समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ईरान को उन्नत हथियार प्रणाली बेचने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, ईरान चीन से सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें खरीदने की तैयारी में है। प्रस्तावित डील के तहत तेहरान को CM-302 मिसाइलें मिल सकती हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर बताई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी मिसाइलें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक जहाजों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

स्टॉकहोम स्थित Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) के अनुसार, चीन इस मिसाइल प्रणाली को दुनिया की अत्याधुनिक एंटी-शिप तकनीकों में गिनता है, जो विमानवाहक पोत जैसे बड़े युद्धपोतों को भी निशाना बना सकती है।

चीन के लिए ईरान क्यों अहम है?

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ईरान चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, चीन प्रतिदिन लगभग 1.8 मिलियन बैरल तेल ईरान से खरीदता है। अनुमान है कि ईरान के कुल तेल निर्यात का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीन को जाता है। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बाद बीजिंग की ऊर्जा निर्भरता तेहरान पर और बढ़ी है। इसके अलावा, यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो उसका सीधा असर Strait of Hormuz पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है और चीन का बड़ा व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो चीन की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में चीन और ईरान की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक शक्ति संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं।

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