
भारत के मशहूर रैपर Badshah इन दिनों एक बड़े विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। उनके हाल ही में रिलीज हुए हरियाणवी गाने “Tateeree” को लेकर इतना हंगामा खड़ा हो गया है कि अब मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
बताया जा रहा है कि Haryana State Commission for Women ने पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए रैपर के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। आयोग का आरोप है कि गाने में इस्तेमाल किए गए कुछ बोल और दृश्य महिलाओं और नाबालिगों के लिए आपत्तिजनक हैं।
यही वजह है कि अब इस विवाद ने मनोरंजन जगत के साथ-साथ सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी बड़ी बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा विवाद?
रैपर का हरियाणवी ट्रैक “Tateeree” हाल ही में रिलीज हुआ था और कुछ ही समय में वायरल भी हो गया। लेकिन वायरल होने के साथ ही इस गाने पर आपत्तियां भी आने लगीं।
कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि गाने के बोल महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक हैं और वीडियो में ऐसे दृश्य हैं जो सामाजिक मर्यादा के खिलाफ हैं। शिकायत मिलने के बाद महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और रैपर को नोटिस भेजा था।
नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुए
महिला आयोग ने रैपर को सुनवाई के लिए बुलाया था, लेकिन वह तय तारीख पर उपस्थित नहीं हुए।
इसके बाद आयोग की चेयरपर्सन Renu Bhatia ने पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़े तो उन्हें कहीं से भी गिरफ्तार किया जाए और उनका पासपोर्ट भी जब्त किया जाए।
इस सख्त रुख के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
FIR और कानूनी कार्रवाई
मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR भी दर्ज कर ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसियां गाने के कंटेंट और वीडियो के विजुअल्स की जांच कर रही हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि गाने के वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई गई लड़कियों और कुछ डायलॉग्स को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है।
रैपर ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद रैपर ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था और अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा चाहते हैं।
हालांकि, आयोग का कहना है कि सिर्फ माफी से मामला खत्म नहीं होगा और पूरे प्रकरण की जांच जारी रहेगी।
सोशल मीडिया पर दो धड़े
इस विवाद के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है।
- कुछ लोग कह रहे हैं कि कलाकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
- वहीं कई लोग मानते हैं कि मनोरंजन के नाम पर महिलाओं या बच्चों के प्रति आपत्तिजनक कंटेंट स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से यह मामला अब केवल एक गाने का विवाद नहीं रहा, बल्कि कला, जिम्मेदारी और सामाजिक मर्यादा के बीच संतुलन की बहस बन चुका है।








