
Army Chief’s strong message to Pakistan, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत लगातार पाकिस्तान को लेकर सतर्क मोड में है। इसी बीच, एलओसी के पास पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियां सामने आईं। इस मुद्दे पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को प्रतिक्रिया दी और पड़ोसी देश को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि डीजीएमओ स्तर पर पाकिस्तान के साथ बात हुई और इसमें भारतीय पक्ष ने स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया।
सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से जो ड्रोन आ रहे हैं, वे छोटे और डिफेंसिव ड्रोन हैं, जिन्हें निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि डीजीएमओ बातचीत में भी इस मुद्दे पर सख्ती से बात की गई। एलएसी पर सेना की तैनाती को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर आगे की तैनाती तुरंत की जा सके।
न्यूक्लियर मुद्दे पर साफ़गोई
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि डीजीएमओ स्तर की बातचीत में न्यूक्लियर हथियारों पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से यह सिखने की बात कही कि जानकारी देने में क्रेडिबिलिटी बहुत जरूरी है और किसी भी तरह का इंफॉर्मेशन गैप नहीं होना चाहिए। ऑपरेशन के दौरान सभी वेस्टर्न फ्रंट हैंडल बंद कर दिए गए थे और केवल सेना के एक आधिकारिक हैंडल से जानकारी दी जा रही थी।
शक्तिबाण रेजिमेंट और ड्रोन क्षमता
सेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय सेना पहले भी ड्रोन का इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी गतिविधियों को और तेज किया गया है। उन्होंने बताया कि शक्तिबाण रेजिमेंट की रेंज शुरू में 100 से 400 किलोमीटर तक होगी और बाद में इसे 700 से 1000 किलोमीटर तक अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने आत्मनिर्भरता को भी प्राथमिकता दी है, और हर कमांड के पास लगभग 500 ड्रोन बनाने की क्षमता है।
दुस्साहस पर कड़ा जवाब
जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति स्थिर है, लेकिन लगातार नजर बनाए रखना जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर ने रणनीतिक सोच को फिर से मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन आतंकी ढांचे को खत्म करने और इस्लामाबाद की लंबे समय से चली आ रही परमाणु बयानबाजी को चुनौती देने के लिए किया गया। सेना प्रमुख ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।”









