
हरियाणा राज्य के सोनीपत जिले की अशोका यूनिवर्सिटी के Professor Ali Khan Mahmudabad को Operation Sindoor को लेकर की गई विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बड़ी राहत मिल गई है। हरियाणा सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ दर्ज मामला आगे नहीं बढ़ेगा और इसे बंद किया जा सकता है।
हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने “एक बार की उदारता” दिखाते हुए अभियोजन की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। सरकार का आदेश 3 मार्च 2026 को जारी किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब Professor Ali Khan Mahmudabad ने सोशल मीडिया पर Operation Sindoor को लेकर एक पोस्ट लिखी थी। Operation Sindoor दरअसल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई से जुड़ा हुआ बताया गया था। इस पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इससे सामाजिक तनाव और राष्ट्रीय अखंडता पर असर पड़ सकता है। इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ ?
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि कई बार शब्दों के छिपे हुए अर्थ निकालने से स्थिति और जटिल हो जाती है।
मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संवेदनशील परिस्थितियों में सभी नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि Professor Ali Khan Mahmudabad एक प्रतिष्ठित विद्वान और अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, इसलिए उम्मीद की जाती है कि वे भविष्य में और अधिक विवेकपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत भी प्रदान की थी।
पासपोर्ट वापस करने की मांग
सुनवाई के दौरान Professor Ali Khan Mahmudabad की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल का पासपोर्ट, जो ट्रायल कोर्ट में जमा है, वापस करने की अनुमति दी जाए।
लूथरा ने कहा कि अदालत की टिप्पणी उनके मुवक्किल के लिए पर्याप्त संकेत है और वे भविष्य में पूरी सावधानी बरतेंगे।
SIT की जांच में क्या सामने आया ?
जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जनवरी 2026 में अदालत को बताया था कि उसने 22 अगस्त 2025 को राज्य सरकार से अभियोजन की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। भारतीय न्याय संहिता के तहत कुछ विशेष धाराओं में मुकदमा चलाने से पहले केंद्र या राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।
किन धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था ?
Professor Ali Khan Mahmudabad के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की निम्न धाराओं का उल्लेख किया गया था:
- धारा 196 – विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित अपराध
- धारा 197 – राष्ट्रीय एकता और अखंडता के खिलाफ बयान देने से जुड़ा प्रावधान
- धारा 353 – सार्वजनिक उपद्रव या शांति भंग करने से जुड़े बयान
इन धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, जिसे हरियाणा सरकार ने देने से इनकार कर दिया।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम संवेदनशीलता की बहस
इस पूरे मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षाविदों और सार्वजनिक व्यक्तियों को अपनी राय रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा या संवेदनशील घटनाओं से जुड़ा हो। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
हरियाणा सरकार के फैसले के बाद अब यह मामला लगभग समाप्त माना जा रहा है। हालांकि अदालत की ओर से दी गई चेतावनी यह संकेत देती है कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय अधिक जिम्मेदारी और सावधानी की जरूरत है।









