
Apple की लोकप्रिय समाचार सेवा Apple News अचानक विवादों के घेरे में आ गई है। अमेरिका की फ़ेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने Apple के CEO टिम कुक को एक चेतावनी पत्र भेजते हुए कहा है कि कंपनी अपने न्यूज़ ऐप के समाचार चयन में राजनीतिक पक्षपात (पॉलीटिकल बायस) कर सकती है — जिससे कंज़र्वेटिव और राइट-लीनिंग समाचार स्रोतों को दबाया जा रहा है। अगर ये आरोप साबित हुए, तो यह उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन भी हो सकता है।
मुख्य कारण
FTC के अध्यक्ष एंड्रयू फर्ग्यूसन ने Apple को लिखा कि कुछ रिपोर्ट्स में पाया गया है कि Apple News ऐप में से अधिकांश शीर्ष समाचार “लेफ्ट-लीनिंग” स्रोतों के हैं जबकि अनेकों प्रमुख राइट-लीनिंग या कंज़र्वेटिव स्रोतों की खबरें Apple News में नहीं दिखाई देतीं। यह मामला मुख्य रूप से Media Research Center नामक मीडिया विश्लेषण समूह की रिपोर्ट पर आधारित है।
FTC ने अपने पत्र में कहा है कि अगर Apple News ने Apple की सेवा शर्तों के विपरीत या उपभोक्ताओं की उम्मीदों के खिलाफ ख़बरों का चयन किया है, तो यह FTC एक्ट के सेक्शन-5 के तहत “अन्यायपूर्ण या भ्रामक प्रथाओं” में आता है।
FTC का कहना क्या है?
- FTC ने स्पष्ट किया है कि वह “स्पीच पुलिस” नहीं है, यानी वह Apple को यह नहीं बता सकती कि क्या राजनीतिक विषय प्रदर्शन करना है।
- लेकिन अगर Apple ने अपने समाचार चयन को लेकर अपनी सेवा शर्तों में कोई जानकारी दफ्नाई है या उपभोक्ताओं को वास्तव में जो दिखाया जा रहा है उस बारे में स्पष्ट नहीं किया है, तो यह उपभोक्ता धोखा देने जैसा व्यवहार माना जा सकता है।
टिम कुक और Apple की प्रतिक्रिया
अभी तक Apple ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है कि वह FTC के इन आरोपों के बारे में क्या कहता है या क्या कदम उठाएगा। कंपनी के प्रवक्ता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है।
क्यों यह मामला अहम है?
यह विवाद तकनीक, समाचार मीडिया और उपभोक्ता अधिकारों के एक अतिसंवेदनशील संगम पर खड़ा है।
आज डिजिटल दुनिया में हर बड़ी कंपनी समाचार सामग्री का फिल्टर करती है, और अगर कोई ऐसा प्लेटफ़ॉर्म राजनीतिक पक्षपात के आरोपों में फँस जाता है, तो इससे न केवल अमेरिका में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टेक कंपनियों के लिए नियम-कानून और ट्रस्ट पर असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, FTC द्वारा Apple को दी गई यह चेतावनी सिर्फ़ एक क़ानूनी पत्र नहीं है — यह तकनीकी दुनिया में स्पष्टता, पारदर्शिता और उपभोक्ता अपेक्षाओं पर सवाल उठाने वाली बड़ी खबर है। उपभोक्ता और टेक समुदाय अब यह देखना चाहेंगे कि Apple इस मामले में क्या स्टैंड लेता है और क्या कंपनी अपने न्यूज़ फ़ीड के चयन को लेकर कोई बड़ा बदलाव करेगी।
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