कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, अमृत पिलाने से… Lyrics

kabhi pyase ko pani pilaya nahin lyrics
kabhi pyase ko pani pilaya nahin lyrics

“कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं” एक परंपरागत भक्ति भजन है जो हमें वास्तविक धर्म, सेवा और कर्म के महत्व को गहराई से समझाता है। भक्ति केवल शब्दों, मंदिरों या पूजा की रस्मों तक सीमित नहीं है। जब तक हम कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं की चेतना — यानि दुःखी, बेसहारा या जरुरतमंद लोगों की सेवा — को अपने जीवन में नहीं अपनाते, हमारी पूजा, ध्यान या सत्संग का कोई स्थायी फल नहीं होता। यही इस भजन का संदेश है।

यह भजन समाज के हर वर्ग के लिए आत्मिक जागरण का एक माध्यम है — विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो सोचते हैं कि धार्मिक कर्म करने से जीवन सफल हो जाता है। असल में, भक्ति वही है जो दूसरों के जीवन को बेहतर बनाती है।

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं Lyrics (पूर्ण हिंदी लिरिक्स)

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं,
बाद आंसू बहाने से क्या फायदा।

मैं तो मंदिर गया पूजा आरती की,
पूजा करते हुए ख्याल आ गया।
कभी माँ बाप की सेवा की ही नहीं,
सिर्फ पूजा करवाने से क्या फायदा।

मैं तो सत्संग गया गुरूवाणी सुनी,
गुरूवाणी को सुनकर ख्याल आया।
जन्म मानव का लेकर दया न करी,
फिर मानव कहलाने से क्या फायदा।

मैंने दान किया, मैंने जप-तप किया,
दान करते हुए ख्याल आया।
कभी भूखे को भोजन खिलाया नहीं,
दान लाखों का करने से क्या फायदा।

गंगा नहाने हरिद्वार काशी गया,
गंगा नहाते ही मन में ख्याल आया।
तन को धोया मगर, मन को धोया नहीं,
फिर गंगा नहाने से क्या फायदा।

मैने वेद पढ़े, मैंने शास्त्र पढ़े,
शास्त्र पढ़ते हुए ख्याल आया।
मैंने ज्ञान किसी को बांटा नहीं,
फिर ज्ञानी कहलाने से क्या फायदा।

माता-पिता के चरणों में चारों धाम हैं,
आजा यही मुक्ति का धाम है।
माता-पिता की सेवा की ही नहीं,
फिर तीर्थ में जाने से क्या फायदा।

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।

(पुनरावृत्ति और भजन के अतिरिक्त छंद विभिन्न स्रोतों अनुसार शामिल किए गए हैं)

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भजन का आध्यात्मिक संदेश

1. सेवा = सच्ची भक्ति

भजन बार-बार यही सिखाता है कि कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं — यानि जब तक हम अपने आसपास के लोगों की मदद नहीं करते, हमारी पूजा, सत्संग, ध्यान या जप-तप का कोई ठोस मूल्य नहीं बनता।

2. कर्म प्रधान धर्म

यह भजन शास्त्रीय मान्यता से आगे जाकर इंसान को अपने कर्म पर सोचने का आमंत्रण देता है। पूजा केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में फलदायी होती है।

3. मानवता और दया

भक्ति तभी सम्पूर्ण होती है जब हम कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं की भावना से प्रेरित होकर दूसरों के दुःख को दूर करने का प्रयास करें। यह संदेश आज के युग में भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पहले था।

समापन विचार

“kabhi pyase ko pani pilaya nahi lyrics” सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि एक जीवन की सीख है। यह हमें याद दिलाता है कि पूजा, सत्संग और धार्मिक कर्म तभी सार्थक होते हैं जब वे मानवता, दया और सेवा-भावना के साथ जुड़े हों। स्व-अनुभव में इसे अपनाकर जीवन को और अधिक अर्थपूर्ण बनाएं।

भक्ति से भरा, सेवा-भाव से प्रबल — यही वास्तविक धर्म है।

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