
UGC New Regulation 2026 को लेकर चल रहा विवाद अब Supreme Court पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (University Grants Commission) के नए नियमों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। याचिका में दावा किया गया है कि नए UGC Regulations में caste-based discrimination की परिभाषा non-inclusive है और यह कुछ वर्गों को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर देती है। बढ़ते विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर मंथन (deliberation) शुरू कर दिया है और experts से सलाह ली जा रही है।
Supreme Court Bench का रुख
इस मामले की सुनवाई Chief Justice सूर्यकांत और Justice Joymalya Bagchi की बेंच ने की । याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि यह रेगुलेशन General Category के खिलाफ भेदभाव को जन्म दे सकता है।
वकील ने कहा, “मेरा केस Rahul Diwan & Others vs Union of India है, जिसमें इस regulation की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है।”
इस पर CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि कमियां दूर की जाएं, हम इसे लिस्ट करेंगे।”
Equity Committee को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
UGC द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए नए नियमों के तहत सभी Higher Educational Institutions को Equity Committees बनाने का निर्देश दिया गया है। इन कमेटियों का उद्देश्य भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करना और Equality & Inclusion को बढ़ावा देना है। लेकिन नियम लागू होते ही इसे लेकर देशभर में विरोध शुरू हो गया।
General Category को प्रतिनिधित्व नहीं
UGC Regulation 2026 के अनुसार, Equity Committees में
OBC
SC
ST
Divyang (Persons with Disabilities)
Women
को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि General Category के लिए कोई प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया, जबकि जाति-आधारित भेदभाव को केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दिया गया है।
Government का मंथन जारी
UGC के इन नए नियमों का nationwide protest हो रहा है। Social Media से लेकर सड़कों तक इसका विरोध देखने को मिल रहा है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस मुद्दे पर legal experts और education specialists से सलाह ले रही है और नियमों में possible amendments पर भी विचार किया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि विरोध करने वालों में अब BJP के कुछ नेता भी शामिल हो गए हैं, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा politically sensitive बन गया है।









